अनामिका अनु की कविताओं का स्वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक को इन कविताओं से जोड़े रखती है। साथ-ही नींव के पत्थर जैसा जीवन जीने वाले आम जन के संघर्ष को बेहद सूक्ष्मता से वे अपनी कविताओं के माध्यम से आकार देती हैं।
-अनुनाद
खदान की ख़तरनाक कविता

बेरोजगारी और भूखमरी मार न दे उसे
इसलिए वह चुपचाप धूल और कोयला फांकेगा
नाइट्रोजन ऑक्साइड सांस में लेगा
तुम वसंत, ख़ुशबू, मंद-मीठी हवा की बात करोगे
वह धुंआ, तपती ज़मीन, खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा
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वह सबकुछ भूल गया

वह सबकुछ भूल गया
उसे याद नहीं रही
विरह की सर्दियां
चुंबनों का घर
स्पर्श की भाषा
मिलन की हँसी
विदाई का कुंआ
दुःख का चापाकल
और सुख की गौरैया
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यह रात उसे कविताओं के साथ गुज़ारनी है

उसकी आँखें कविताओं से भारी हैं
उसके कंठ कविताओं से भरे हैं
उसके ओंठ कविताओं से हल्के गुलाबी हैं
उसकी देह कविताओं के लिए तत्पर और तैयार है
उसकी साँसों में कविताओं की गमक है
मैंने उसे गर्मजोशी के साथ अलविदा कहा
यह रात उसे कविताओं के साथ गुज़ारनी है
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तुम कभी विदा नहीं हुए

तुम्हारा फ़ोन आया
मैंने तुमसे बातें की
तुम्हारे शब्द व्यर्थ हुए
तुम्हारा फ़ोन नहीं आया
मैंने तुमसे बातें नहीं की
‘शब्द व्यर्थ नहीं हुए’
यह पंक्ति कितना सुख देने वाली है
तुम मेरे घर आए
मैंने तुम्हें देखा
चाय पिलायी
विदा किया
कुंडी लगायी
ज़ोर से रोयी
मगर तुम मुझसे कभी मिले नहीं
तुम मेरे घर भी नहीं आए
मैंने तुम्हें नहीं देखा
तुमने नहीं पी कोई चाय
‘तुम कभी विदा नहीं हुए’
यह पंक्ति कितनी सुंदर है
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तुम स्वयं संभावना हो

तुम स्वयं संभावना हो
सुख भौंकते हुए आता है
दुख बिल्ली की तरह आहिस्ता
और बिना किसी पदचाप के
हर जख़्म एक दरवाज़ा है
हर खरोंच एक खिड़की है
प्रेम एक पूरी दुनिया है
मुस्कान एक खुलती हुई खिड़की है
चमकती हुई आंखें दिल को जाती सड़कें हैं
बुझी हुई आँखें आत्मा की ओर जाती सुरंगें हैं
तुम्हारा चेहरा, एक संपन्न दुनिया है
जिसमें आज़ादी का दरवाज़ा है
रोशन खिड़िकियां हैं
तुम स्वयं संभावना हो
एक उम्मीद
जो कितनों को जीवित और खुश रखती है।
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हादसा

किताबों के बीच छोड़कर अपना सिर
वह जाती रही बिस्तर पर
उस दिन भी
बेसिर ही मिली वह बिस्तर पर
उसका सिर किताबों के बीच ढूंढ़ा
ख़ोजी कुत्तों ने
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परिचय:
1 जनवरी 1982 को मुज़फ़्फ़रपुर में जन्मी और केरल में रह रही डॉ.अनामिका अनु को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (2020), राजस्थान पत्रिका वार्षिक सृजनात्मक पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ कवि, प्रथम पुरस्कार, 2021) रज़ा फेलोशिप (2022), 2023 का ‘महेश अंजुम युवा कविता सम्मान’ (केदार न्यास) और 2025 का प्रतिभा सम्मान (केरल हिंदी प्रचार सभा) मिल चुका है।उनके प्रकाशित काव्यसंग्रह का नाम ‘इंजीकरी’ (वाणी प्रकाशन)है। उनके प्रकाशित कथा संग्रह का नाम है : ‘येनपक कथा और अन्य कहानियाँ’। यह किताब मंजुल प्रकाशन से आयी है। उन्होंने ‘यारेख : प्रेमपत्रों का संकलन’ (पेंगुइन रैंडम हाउस) का सम्पादन करने के अलावा ‘केरल से अनामिका अनु : केरल के कवि और उनकी कविताएँ’ का भी सम्पादन किया है। इनकी किताब ‘सिद्धार्थ और गिलहरी’ को राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है, जिसमें के. सच्चिदानंदन की इक्यावन कविताओं का अनुवाद है। उन्होंने मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जीवनी भी लिखी है। उनकी रचनाओं का अनुवाद पंजाबी, मलयालम, तेलुगू, मराठी, नेपाली, उड़िया, गुजराती, असमिया, अंग्रेज़ी, कन्नड़ और बांग्ला में हो चुका है।
वह एमएससी (विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक) और पीएच डी (इंस्पायर अवॉर्ड, डीएसटी) भी हैं। अनामिका अनु की रचनाएँ देशभर की सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और मीडिया में देखने, पढ़ने और सुनने को मिलती हैं।
सम्पर्क
anuanamika18july@gmail.com
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