अनुनाद

कविता

और इधर एक स्त्री यादों में खोई गाती रहती है ‘कलकतवा से मोर बलमू अइलें हो राम’/ चन्‍दन कुमार की कविताएं

चन्‍दन कुमार की कविताएं अटपटे सामाजिक बंधनों, दुर्व्‍यवस्‍थाओं और खोखलेपन से लिथड़े  समाज के प्रति अन्‍तर्मन की छटपटाहट को व्‍यक्‍त करती

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घाटी की छोटी-छोटी जलधाराओं ने हमेशा ही रखना चाहा उसके रहवास को जीवित/ हिमांशु विश्‍वकर्मा की कविताएं

       हिमांशु की कविताएं अपने आस-पास बिखरे लोक की भावनाओं को उसी के डिक्‍शन में अभिव्‍यक्‍त करती हैं, जहां

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भटकने से एक दिन मिल ही जाता है इस जनम के गूढ़ सवालों का जवाब/ योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं

  योगेन्‍द्र पांडेय की कविताएं प्रकृति, प्रेम, सौन्‍दर्य, आशा-निराशा, जीवन दर्शन के बीच विचरती रहती हैं। समकालीन कविता संसार में ये

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और इसी भीड़ में सबसे बड़ा अकाल मनुष्य का है/ शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं

  शैलेन्‍द्र चौहान की कविताएं वैश्विक स्‍तर पर व्‍याप्‍त विषमताओं से व्‍याकुल कवि मन को दर्शाती हैं। चारों ओर फैले कुहासे

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अपने बच्चों में ख़ुदा की सूरत देखती माँओं को क्या ज़वाब दोगे तुम/कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं

कुँवर रवीन्‍द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्‍यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में

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जिन नदियों को पृथ्वी पर जगह न मिली उन्होंने चुन लिया मनुष्य की आँखों में रहना!/ज्योतिकृष्ण वर्मा की कविताएं

ज्‍योतिकृष्‍ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे

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वह धुंआ, तपती जमीन, खांसी और मौत को एक ख़तरनाक कविता की तरह जी जाएगा – अनामिका अनु की कविताएँ

अनामिका अनु की कविताओं का स्‍वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक

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तुम्हें ख़ून चूसने वालों के दांतों से अधिक चुभना चाहिए उनका भिंचा हुआ जबड़ा / पल्‍लवी की कविताऍं

पल्‍लवी की कविताएं समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों,पाखंड से संवेदना भरे मन में होने वाली उथल-पुथल को सामने लाती हैं। इन विसंगतियों

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