अनुनाद

आलोचना / समीक्षा

पत्‍थर के बिस्‍तरों पर पानी की चादरें हैं। मेरे हिमाल पर अब शानी की चादरें हैं।। / शिरीष कुमार मौर्य

नेत्रसिंह रावत की इस पुस्‍तक से पहला परिचय 1992 में हुआ, यानी इसके प्रकाशन के लगभग दस वर्ष बाद और मेरी

Read More...

कोणार्क : कला का औदात्य और शिल्पी का समर्पण – अंबुज कुमार पाण्डेय

कुबेरनाथ राय और धर्मवीर भारती ने समर्पित कलासाधक को ‘संपाती’ के तुल्य बताया है। सौंदर्य का ऐसा उपासक जो सच्ची कला

Read More...
error: Content is protected !!
Scroll to Top