अनुनाद

कविता

कासिम हद्दाद बहरीन के विद्रोही जनकवि – चयन, अनुवाद और प्रस्तुति: यादवेन्द्र

तैयार हो जाओ,जो सामने दिख रहा है वो इतिहास है 63 वर्षीय कासिम हद्दाद बहरीन के विद्रोही जनकवि माने जाते हैं.स्कूल

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सभ्यता के उजाड़ कोनो में कवितायें बेआवाज़ पड़ी रहती हैं – बसंत त्रिपाठी की दो कविताएं

बेआवाज़ पत्तियों के झरने की आवाज़ की आवाज़ होती है हवा धीमी आवाज़ के साथ बहती है चूजे अण्डों से निकलकर

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महेश वर्मा की कविताएँ

हिसाब ब्लेड से पेंसिल छीलते में एक पूर्ण विराम भर कट सकती है उंगली लेकिन अश्लील होता बिल्कुल सफ़ेद काग़ज़ पर

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