निज़ार कब्बानी की एक कविता – अनुवाद एवं प्रस्तुति : मनोज पटेल
ख़ुदा से सवाल मेरे ख़ुदा ! यह क्या वशीभूत कर लेता है हमें प्यार में ? क्या घटता है हमारे भीतर
ख़ुदा से सवाल मेरे ख़ुदा ! यह क्या वशीभूत कर लेता है हमें प्यार में ? क्या घटता है हमारे भीतर
(1943 में जन्मी निकी जियोवानी अफ्रीकी मूल की अमरीकी कवयित्री हैं, इनकी कविताओं में नस्लीय गौरव और प्रेम की झलक है।
1943 में जनमी विकी फीवर अंग्रेजी में लिखने वाली स्कॉट्लैंड की प्रमुख कवि हैं,जिन्हें स्त्री विषयक कविताओं के लिए जाना जाता
राजेश सकलानी अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो कुमार अम्बुज, लाल्टू, एकांत श्रीवास्तव, कात्यायनी के समकालीन बैठेंगे।
मैं बेहद परेशान हूं इन दिनों पलट डाले आलमारी में सजे सारे शब्दकोश कितनी ही ग़ज़लों के नीचे दिये शब्दार्थ गूगल
खाना पकानानानी ने जाने से एक रोज़ पहले कहा – सच बात तो यह है कि मुझे कभी खाना पकाना नहीं
पब्लिक एजेंडा के साहित्य विशेष से मैंने पिछली पोस्ट में राजेश जोशी की कविता लगाई थी. इस बार अग्रज कवि-अनुवादक नरेन्द्र
राजेश जोशी अपनी पीढ़ी के सर्वाधिक चर्चित कवि हैं। साधारण लोगों से जुड़ी कई असाधारण और महत्वपूर्ण कविताएँ उन्होंने लिखी हैं।
ताल के ह्रदय बले दीप के प्रतिबिम्ब अतिशीतल जैसे भाषा में दिपते हैं अर्थ और अभिप्राय और आशय जैसे राग का
मैं यहाँ दो छोटी अमेरिकी कवितायेँ दे रहा हूँ जिन दोनों का सामान विषय है—बुढ़ापा….पर इन दोनों में इस विषय के