अनुनाद

All Blogs

विपिन चौधरी की दस कविताएं

विचित्र लेकिन बहुत सुन्‍दर है आज की, अभी की हिंदी कविता का युवा संसार। कितनी तरह की आवाज़ें हैं इसमें, कितने रंग-रूप, कितने चेहरे, अपार

Read More »

गौतम राजरिशी की पांच ग़ज़लें

इन ग़ज़लों में नए प्रयोग हैं। सायास हिंदीपन नहीं, बोली-बानी का अहसास ज़रूर है। हिंदी में ग़ज़ल कहना मुश्किल बात है इसीलिए स्‍थापित नाम भी

Read More »

माया गोला की तीन कविताएं

1. दुनिया के सारे धर्मग्रंथ कर दिए जाएं तहख़ानों के हवाले (भले ही कुछ समय के लिए) और पढ़े जाएं सिर्फ़ प्रेमग्रंथ…….. अवतारों के रूप

Read More »

हरेप्रकाश उपाध्‍याय की सात कविताएं

हरेप्रकाश उपाध्‍याय की कविताओं का इंतज़ार, अनुनाद के लिए बहुत पुराना इंतज़ार था। अब जाके पूरा हुआ। कठिन प्रखर प्रतिभा, सख्‍़त बोली, अक्‍खड़-फक्‍कड़ व्‍यवहार के

Read More »

संगीत और जीवन का तारतम्य : वंदना शुक्‍ल की कविताएं

सुपरिचित कथाकार-कवि वंदना शुक्‍ल इस बार अनुनाद के लिए संगीत का अनुपम उपहार लायीं तो लगा किसी अमर प्रतीक्षा का सुफल मिला। कविता के कार्यकर्ता

Read More »

अरुण श्री की कविताएं

अरुण श्री की कविताएं संभवत: मैंने पहली बार असुविधा ब्‍लाग पर पढ़ी और वे मुझे लगा कि इधर फेसबुक पर तैयार हो रही एक नई

Read More »

शैलजा पाठक की कविताएं

शैलजा पाठक की ये कविताएं मेल में मिलीं। इन्‍हें पढ़ना शुरू किया तो लगा एक अनगढ़ वृत्‍तान्‍त के कई सिरे खुलते जा रहे हैं। यह

Read More »

लोक और कविता – 1 /लोक की अवधारणा तथा लोकधर्म – जितेन्द्र कुमार

लोक की अवधारणा को बिलकुल नए अध्येता अब मिल रहे हैं। मेरे दो विद्यार्थी जितेन्द्र कुमार और शिव प्रकाश त्रिपाठी इसी सत्र में शोध के

Read More »
error: Content is protected !!
Scroll to Top