अनुनाद

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अरुण देव की कविताएँ

समकालीन अच्‍छे दिनों की निरर्थकता के बरअक्‍स नए दिनों की स्‍थापना देते ये कवि साथी अरुण देव हैं। उनकी कविताएं बताती हैं कि अपने नज़दीक

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विमलचन्‍द्र पांडेय की कविताएं : मीरा स्‍मृति पुरस्‍कार की बधाई के साथ

रेखांकन : कुंवर रवीन्‍द्र विमलचन्‍द्र पांडे का जीवट से भरा गद्य सैकड़ों में पहचाना जाता है और वही गद्य जब कविता के शिल्‍प में ढलता

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युगीन जटिलताओं के मध्य आदमी और उसके समय का आख्यान रचती कविताएं – राहुल देव

(राहुल देव युवा समीक्षक हैं। अभी उन्‍होंने असुविधा ब्‍लॉग पर आत्‍मारंजन के कविता संग्रह पर बहुत सधी हुई समीक्षा लिखी है। अनुनाद पर वे पहली

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तुषारधवल की कविता

तुषार का दूसरा संग्रह : दख़ल प्रकाशन ये शरद की रातें हैं (मित्र कवि शिरीष कुमार मौर्य की इसी शीर्षक की कविता पर चित्र बनाते

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अनिल कार्की की नई कविताएं।

अनिल कार्की विकल, विकट और अंतहीन छटपटाहटों का कवि है। ये मनुष्‍य से आगे एक विचारवान मनुष्‍य होने की छटपटाहटें हैं, जो उसे समय में

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संतोष एलेक्‍स के कविता संग्रह ‘पांव तले की मिट्टी’ पर आशीष कुमार की समीक्षा

  लोकोन्‍मुख आस्‍वाद की कविताएं :पांव तले की मिट्टी  – आशीष कुमार “ कहा जा रहा है कविता खत्‍म हो रही है पर मुझे हर

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