अनुनाद

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नीलोत्पल की कविताएं

नीलोत्पल की कविताएं मानुष जीवन के ताप से भरी कविताएं हैं। जीवन के पकने की गंध जैसे फ़सल पकी हो या फल पके हों –

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बच्चे की ओर से उसके पैर के प्रति – पाब्लो नेरूदा : मूल स्‍पैनिश से अनुवाद – श्रीकान्‍त दुबे

श्रीकान्‍त दुबे सुपरिचित कवि-कथाकार और अनुवादक हैं। अभी मंतव्‍य के प्रवेशांक में उनका मैक्सिको यात्रावृत्‍तान्‍त ख़़ूब पढ़ा और सराहा गया है। श्रीकान्‍त ने अपने मिज़ाज़

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अँधेरे से बाहर उम्मीद और रौशनी की कविताएं : राहुल देव के कविता संग्रह पर विनोद कुमार

‘उधेड़बुन’ हर सजीव प्राणी के अन्दर कभी न कभी अवश्य होती है | छोटे लोगों के पास अपनी छोटी उधेड़बुनें हैं तो बड़े बड़े लोग

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हेमा दीक्षित की कविताएं

२१ जुलाई को कानपुर में जन्म.कानपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक एवं विधि स्नातक. हिन्दी साहित्य एवं अंग्रेजी साहित्य लेखन में रूचि. हाल ही

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केशव तिवारी बरास्ते ‘तो काहे का मैं’ – आशीष मिश्र

केशव तिवारी आज के महत्‍वपूर्ण कवियों में हैं। अनुनाद पर ही प्रकाशन तिथि के क्रमानुसार शिरीष कुमार मौर्य, सुबोध शुक्‍ल तथा महेश पुनेठा के लेख

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