कविता में भरोसेमंद आवाज़ें – विजय कुमार
गोविंद माथुर के हाल में प्रकाशित कविता संग्रह ‘ नमक की तरह ‘ को पढ़ना एक प्रीतिकर अनुभव है। भारतीय निम्न मध्य वर्ग का एक
गोविंद माथुर के हाल में प्रकाशित कविता संग्रह ‘ नमक की तरह ‘ को पढ़ना एक प्रीतिकर अनुभव है। भारतीय निम्न मध्य वर्ग का एक
राकेश रोहित की कविताएं एक वक़्त से फेसबुक और उनके ब्लॉग पर पढ़ता रहा हूं। मद्धम आंच से भरी उनकी कविताएं मनुष्यता के पक्ष में
मेरा सुजाता से पहला परिचय चोखेरबाली ब्लाग की वजह से है और दूसरा फेसबुक पर। इतना जानना भी इस मायने में पर्याप्त है कि मैंने
अनुनाद पर बहुत समय बाद अपना लिखा कुछ लगा रहा हूं। ज़्यादा कुछ नहीं बस मेरे कुछ प्रलाप भर हैं। अकेले आदमी का प्रलाप कविता
कमल अनुनाद के प्रिय कवियों में से हैं पर इधर बहुत समय बाद उनकी कविताएं मिली हैं। पहली बार प्रकाशित हो रहीं ये कविताएं तीन-चार
(एक) जिन सड़कों पर कोई नहीं चलता वे भी कहीं न कहीं जाती हैं उन घरों में किस्से रहते हैं जो अब खाली हैं यह
भारतीय स्त्री के जीवन के करुण महाख्यान के कुछ पृष्ठ लिखती सोनी पाण्डेय की यह कविता प्रस्तुत करते हुए अनुनाद उनका आभारी है। यह पृष्ठ
इसी मुल्क का ज़िंदा बाशिंदा अब मैं इससे ज्यादा वेदना से नही रो सकता इससे ज्यादा आंसू नहीं हैं मेरे पास मन भर की कराह
गिरिराज किराड़ू नामक हमारा साथी और प्रिय कवि कविता के इलाक़े में इतना धैर्यवान है कि हमारे धैर्य की परीक्षा लेने लगता है। बहुत प्रतीक्षा
कविता में प्रयोग एक पुराना पद है। कभी-कभी वह नए आशय के साथ प्रकट होता है तो ध्यान खींचता है। दुनिया बदल गई है। पुरानी