अनुनाद

All Blogs

एक पागल आदमी की चिट्ठी-सी विकल कविता – विमलेश त्रिपाठी की दो लम्बी कविताओं पर रसाल सिंह का लेख

विमलेश त्रिपाठी समकालीन समय के सर्वाधिक संभावनाशील और विश्वसनीय युवा साहित्यकार हैं। उन्होंने हम बचे रहेंगे, एक देश और मरे हुए लोग (कविता-संग्रह), अधूरे अंत

Read More »

कुँवर रवीन्द्र : बोध और द्वन्द के सजग शिल्पी – उमाशंकर सिंह परमार

कुंवर रवीन्द्र पर कुछ पहले किसी पत्रिका के लिए मैंने एक लेख लिखा था, जो छपा पर मुझसे कहीं गुम हो गया। अभी मुझे मेलबाक्स

Read More »

अमित श्रीवास्तव की नई कविता

अमित इधर लगातार राजनीतिक क्रूरताओं के बीच फंसी मनुष्यता के आख्यान रच रहा है। उसकी विकट बेचैनी उसके लिखे में गूंजती है। ऐसी बेचैनियों के

Read More »

अजय सिंह के कविता संग्रह पर अजीत प्रियदर्शी

हाशिये की आवाजों से भरी मुखर कविता प्रखर पत्रकार व वाम राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठनों से लम्बे समय से सक्रिय रूप से जुड़े आंदोलनधर्मी, प्रतिबद्ध विचारक

Read More »

स्मृति एदुआर्दो गेलेआनो : यादवेन्द्र

13 अप्रैल को लैटिन अमेरिका के 74 वर्षीय विद्रोही रचनाकार पत्रकार एदुआर्दो गेलेआनो का कैंसर से निधन हो गया। भले ही उनकी कर्मभूमि उरुगुए रहा हो पर

Read More »

संदीप नाइक की कविताएं

  संदीप  नाइक की कविताएं मुझे उनसे एक फेसबुक संवाद के बीच मिलीं। उनकी पुस्तक ‘नर्मदा घाटी की कहानियां’ अभी अंतिका प्रकाशन से छपी है

Read More »

दीपक तिरुवा की दो कविताएं

कभी हमें ऐसी कविताएं मिलती हैं, जिनसे गुज़रने के अनुभव हमारे अब तक के लिखे-पढ़े को और समृद्ध करते हैं। दीपक तिरुवा की कविताएं, ऐसी

Read More »

विजय गौड़ की कविताएं

विजय कई वर्षों से कथा और कविता के प्रदेश के नागरिक हैं। इस ख़ूब विचारवान और अनुभवसम्पन्न साथी की कविताएं बहुत समय बाद अनुनाद को

Read More »

वीरू सोनकर की दस कविताएं

वीरू सोनकर सोशल मीडिया पर सक्रिय उन नौउम्र कवियों में हैं, जिनकी कविता मैं अकसर उत्सुक के साथ पढ़ता हूं। ये कविताएं मुझसे कहती हैं

Read More »
error: Content is protected !!
Scroll to Top