अनुनाद

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यह चमकीले शब्दों से भरे मनुष्यता के धूसर दिन थे – राकेश रोहित

तीस छोटी कविताएँ 1. प्रेमियों का एकांत  …और जबकि इतनी धूप खिली है प्यार कैसे तुमको छू रहा है क्या अब भी आकाश के किसी कोने में प्रेमियों का एकांत है?  2. नदी, पत्ती और प्रेम  कई बार नदी पर तैरती पत्ती से भी हो

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आशीष बिहानी की कविताएं

आशीष बिहानी की कविताएं अनुनाद पर कुछ दिन पहले ही लगनी थीं पर नेट की रफ़्तार ने साथ नहीं दिया। इस संभावनाशील युवा कवि का

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आज वीरेन दा का जन्मदिन है

अग्रज कवि वीरेन डंगवाल के लिए ये दो कविताएं, जो मेरे इस बरस ‘आए-गए’ संग्रह ‘खांटी कठिन कठोर अति’ में शामिल हैं। इनमें से एक

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स्मरण में है आज जीवन : वसुंधरा ताई कोमकली – संदीप नाईक

“जब होवेगी उम्र पुरी, तब टूटेगी हुकुम हुजूरी, यम के दूत बड़े मरदूद, यम से पडा झमेला” (पंडित स्व कुमार गन्धर्व की पत्नी पदमश्री वसुंधरा

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लवली गोस्वामी की कविताएं

दख़ल प्रकाशन से आयी लवली गोस्वामी की किताब ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता (भारतीय मिथकों का पुनर्पाठ)’ चर्चा में है।कवि का स्वागत और इन

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चन्द्र गुरूङ्ग की कविताएं

अनुनाद पर पहले कभी अनिल कार्की के अनुवादों के सहारे नेपाली कविता छपी थी। एक बड़े अंतराल के बाद अब चन्द्र गुरूङ्ग की कविताएं यहां

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