ग़ालिब की शाइरी पर नीलाभ की टिप्पणी
सौ पुश्त से है पेश:-ए-आबा सिपहगरी कुछ शाइरी ज़रीय:-इज़्ज़त नहीं मुझे ग़ालिब के दीवान को उलटते-पलटते हुए मुझे एक बात महसूस होती रही है कि
सौ पुश्त से है पेश:-ए-आबा सिपहगरी कुछ शाइरी ज़रीय:-इज़्ज़त नहीं मुझे ग़ालिब के दीवान को उलटते-पलटते हुए मुझे एक बात महसूस होती रही है कि
फ्रेडी ग्रे अमेरिका के मेरीलैंड राज्य के बाल्टीमोर में 12 अप्रैल 2015 को गैरकानूनी तौर पर ऑटोमेटिक चाकू रखने के आरोप में एक 25 वर्षीय अश्वेत
अरुण लेखन की शुरूआत से ही मुझे हमेशा अपनी कविताओं में बांधते रहे हैं, पर उनकी कविताओं ने इधर एक अलग स्वर पा लिया है।
जिस दौर में कवि होने को एक तमगे की तरह इस्तेमाल कर लोग किसी भी तरह खुद को स्थापित करने की होड़ में हैं आश्चर्य
सोनी पांडेय की कविताएं मुखर स्त्री विमर्श के बरअक्स एक सामान्य घरेलू स्त्री के घर-दुआर की कविताएं हैं। मुक्ति का स्वप्न यहां अंतर्धारा की तरह
‘कविता लिखने के लिए कवि होना ज़रूरी नहीं। ’ ये ब्रह्म वाक्य मुझे एक ‘कविता: कल, आज, कल और परसों’ नामक भ्रामक गोष्ठी के दौरान
राजीव ध्यानी की कविताएँ मैंने पहली ही बार फेसबुक पर देखीं। मालूम हुआ कि 1995 में उनका संग्रह अकसर कागज़ नाम से आया था। इन
हमारे वक़्त के ये यक्ष-युधिष्ठिर संवाद, जिन्हें इन्हीं में से चुराकर मैंने ऊपर एक शीर्षक दे दिया है। यक्ष पूछता है – क्या तुम मेरे
अगस्त 2014 के पूर्वार्ध में सेंट लुइस के अश्वेत बहुल फर्गुसन में 18 वर्षीय अश्वेत नौजवान माइकेल ब्राउन की एक गोरे पुलिस ऑफिसर डेरेन विल्सन ने दिन दहाड़े गोली मार
महाभूत चन्दन राय द्वारा फेसबुक पर लगाई जा रही इन कविताओं पर निगाह पड़ते ही ठहर गई। मैंने उनसे अनुनाद के लिए इन्हें मांगा और