चन्द्र गुरूङ्ग की कविताएं
अनुनाद पर पहले कभी अनिल कार्की के अनुवादों के सहारे नेपाली कविता छपी थी। एक बड़े अंतराल के बाद अब चन्द्र गुरूङ्ग की कविताएं यहां
अनुनाद पर पहले कभी अनिल कार्की के अनुवादों के सहारे नेपाली कविता छपी थी। एक बड़े अंतराल के बाद अब चन्द्र गुरूङ्ग की कविताएं यहां
मुझे यक़ीन है कि पानी यहीं से निकलेगा गाँव भीतर गाँव बरसों पहले ग्वालियर रेड़ियो के निदेशक ने मुझसे पूछा था, ‘ ओम जी आपकी
संतोष कुमार चतुर्वेदी की नयी कविताएँ, अनुनाद के पाठकों के लिए। हां, इनमें सांसद/विधायक सीट वाली कविता इससे पहले पहल में छप चुकी है और
सौ पुश्त से है पेश:-ए-आबा सिपहगरी कुछ शाइरी ज़रीय:-इज़्ज़त नहीं मुझे ग़ालिब के दीवान को उलटते-पलटते हुए मुझे एक बात महसूस होती रही है कि
फ्रेडी ग्रे अमेरिका के मेरीलैंड राज्य के बाल्टीमोर में 12 अप्रैल 2015 को गैरकानूनी तौर पर ऑटोमेटिक चाकू रखने के आरोप में एक 25 वर्षीय अश्वेत
अरुण लेखन की शुरूआत से ही मुझे हमेशा अपनी कविताओं में बांधते रहे हैं, पर उनकी कविताओं ने इधर एक अलग स्वर पा लिया है।
जिस दौर में कवि होने को एक तमगे की तरह इस्तेमाल कर लोग किसी भी तरह खुद को स्थापित करने की होड़ में हैं आश्चर्य
सोनी पांडेय की कविताएं मुखर स्त्री विमर्श के बरअक्स एक सामान्य घरेलू स्त्री के घर-दुआर की कविताएं हैं। मुक्ति का स्वप्न यहां अंतर्धारा की तरह
‘कविता लिखने के लिए कवि होना ज़रूरी नहीं। ’ ये ब्रह्म वाक्य मुझे एक ‘कविता: कल, आज, कल और परसों’ नामक भ्रामक गोष्ठी के दौरान
राजीव ध्यानी की कविताएँ मैंने पहली ही बार फेसबुक पर देखीं। मालूम हुआ कि 1995 में उनका संग्रह अकसर कागज़ नाम से आया था। इन