अमित श्रीवास्तव की नई कविता
अमित ने अपनी कविताओं में कई स्तरों पर प्रयोग किए हैं। उनमें कुंभ पर लिखी एक कविता मेरी याद में सबसे ऊपर है। ये प्रयोग,
अमित ने अपनी कविताओं में कई स्तरों पर प्रयोग किए हैं। उनमें कुंभ पर लिखी एक कविता मेरी याद में सबसे ऊपर है। ये प्रयोग,
तीस छोटी कविताएँ 1. प्रेमियों का एकांत …और जबकि इतनी धूप खिली है प्यार कैसे तुमको छू रहा है क्या अब भी आकाश के किसी कोने में प्रेमियों का एकांत है? 2. नदी, पत्ती और प्रेम कई बार नदी पर तैरती पत्ती से भी हो
आशीष बिहानी की कविताएं अनुनाद पर कुछ दिन पहले ही लगनी थीं पर नेट की रफ़्तार ने साथ नहीं दिया। इस संभावनाशील युवा कवि का
पंकज समर्थ आलोचक और प्रिय कवि हैं। अनुनाद की स्थापना से ही उनका इस पत्रिका से गहरा लगाव रहा है। अनुनाद के पन्नों पर उनकी
अग्रज कवि वीरेन डंगवाल के लिए ये दो कविताएं, जो मेरे इस बरस ‘आए-गए’ संग्रह ‘खांटी कठिन कठोर अति’ में शामिल हैं। इनमें से एक
“जब होवेगी उम्र पुरी, तब टूटेगी हुकुम हुजूरी, यम के दूत बड़े मरदूद, यम से पडा झमेला” (पंडित स्व कुमार गन्धर्व की पत्नी पदमश्री वसुंधरा
जबकि हमारी अपनी ही स्मृतियां निर्जनता के कगार पर खड़ी हैं, अशोक तीन बुज़ुर्गों से कविता में संवाद कर रहा है। यहां तीन अलग लोग
हमें कविताओं से क्या मिलता है कोई जीडीपी में बढ़त दर्ज करता है तो कैसे करता है जबकि हम कविता से बर्फ़ीली सर्दियों में जुराबों
दख़ल प्रकाशन से आयी लवली गोस्वामी की किताब ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता (भारतीय मिथकों का पुनर्पाठ)’ चर्चा में है।कवि का स्वागत और इन
अनुनाद पर पहले कभी अनिल कार्की के अनुवादों के सहारे नेपाली कविता छपी थी। एक बड़े अंतराल के बाद अब चन्द्र गुरूङ्ग की कविताएं यहां