अनुनाद

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विद्रोही के साथ चलना हर किसी के लिए आसान नहीं है – प्रणय कृष्ण

“नाम है-रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’। ज़िला सुल्‍तानपुर के मूल निवासी। नाटा कद, दुबली काठी, सांवला रंग, उम्र लगभग 50 के आसपास, चेहरा शरीर के अनुपात में

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लाल्टू की नई कविताएं

मुझे कुछ ही देर पहले ये कविताएं मिली हैं और मैं इन्हें एक सांस में पढ़ गया हूं। आज और अभी के हिंसक प्रसंगों के

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उत्तर सदी की हिन्दी कहानी : समाज और संवेदनाएं -संदीप नाईक

मित्रों, उत्तर सदी की हिन्दी कहानी का विकास दुनिया के किसी भी साहित्य में उपलब्ध प्रक्रिया के तहत अपने आप में अनूठा होगा इस लिहाज

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