इमरजेंसी : एक पारंपरिक रूपक – प्रस्तुति : विकासनारायण राय
राजा बोला रात है रानी बोली रात है मंत्री बोला रात है संत्री बोला रात है यह सुबह-सुबह की बात है
राजा बोला रात है रानी बोली रात है मंत्री बोला रात है संत्री बोला रात है यह सुबह-सुबह की बात है
द पीस पोएट्स के ल्यूक नेफ्यू का यह प्रतिरोध गीत पिछले कई महीनों से अमेरिका के अश्वेत बहुल इलाकों में आजकल अक्सर सुनायी देता है
गंदे पोस्टकार्ड अविनाश मिश्र मेरी एकांतप्रियता का जन्म तब हुआ जब लोगों ने मेरी वाचाल त्रुटियों की प्रशंसा प्रारंभ की और मूक गुणों की निंदा…
शायक की दस कविताएं पहले अनुनाद पर लग चुकी हैं। शायक के मुहावरे में कोई फेरबदल तब से कमोबेश नहीं हुआ है और मुझे यह
कृष्णकांत पहली बार अनुनाद पर हैं। इस नई विचारवान प्रतिभा का यहां स्वागत है। वह समाज और साहित्य में प्रतिबद्धता के साथ लगातार चलती एक
आशीष मिश्र की ओर से मुझे यह सुखद संचयन प्राप्त हुआ। इसे भेजते हुए आशीष ने लिखा है –”मैंने सुबोध जी के इन ‘स्पार्क्स’ को
मृत्युंजय प्रभाकर की नई कविताएं मुझे मिली हैं। आक्रोश, विषाद-अवसाद, द्रोह-विद्रोह की कुछ अलग अर्थच्छवियों के बीच इन कविताओं को पढ़ा मैंने। मृत्युंजय कुछ दिन
विमलेश त्रिपाठी समकालीन समय के सर्वाधिक संभावनाशील और विश्वसनीय युवा साहित्यकार हैं। उन्होंने हम बचे रहेंगे, एक देश और मरे हुए लोग (कविता-संग्रह), अधूरे अंत
कुंवर रवीन्द्र पर कुछ पहले किसी पत्रिका के लिए मैंने एक लेख लिखा था, जो छपा पर मुझसे कहीं गुम हो गया। अभी मुझे मेलबाक्स
अमित इधर लगातार राजनीतिक क्रूरताओं के बीच फंसी मनुष्यता के आख्यान रच रहा है। उसकी विकट बेचैनी उसके लिखे में गूंजती है। ऐसी बेचैनियों के