हल और हलंत के कवि: अष्टभुजा शुक्ल के कविता संग्रह पर आशीष मिश्र
इस समीक्षा का मूल रूप ‘पक्षधर’ में छपा है। यहां इसे संशोधन (समीक्षक के शब्दों में काफ़ी जोड़-घटाव) के उपरान्त पुन:प्रकाशित किया जा रहा है।
इस समीक्षा का मूल रूप ‘पक्षधर’ में छपा है। यहां इसे संशोधन (समीक्षक के शब्दों में काफ़ी जोड़-घटाव) के उपरान्त पुन:प्रकाशित किया जा रहा है।
शायक आलोक से मुलाक़ात का माध्यम फेसबुक है। इस नौजवान की कविता ने मुझे बहुत शुरूआत से अपनी ओर खींचा। अनुनाद पर पहली बार फेसबुक
निराला की लम्बी कविता ‘राम की शक्तिपूजा’ की नाट्य प्रस्तुति के लिए सुपरिचित युवा कवि व्योमेश शुक्ल और रंगमंडल ‘रूपवाणी’ इन दिनों चर्चा में है।
जिन दिनों कर्ज़ नेमत हों और फ़र्ज़ कुफ़्र, उन दिनों यानी इन दिनों की इस कविता में शिल्प की हर सरहद को उलांघ देने की
परिकल्पित कथालोकांतर काव्य-नाटिका नौरात,शिवदास और सिरी भोग वगैरह (दिवंगत अग्रजों शैलेश मटियानी और गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ को किंचित क्षमा-याचना के साथ याद करते हुए, सादर)
प्रौढ़ कवियों के युवा कहलाने के दौर में राहुल देव एक नौउम्र कवि हैं। युवा कविता के सैलाब में कुछ अन्तर्धाराएं हैं, जिनके जल का
लाल्टू उस दौर में शुरूआत करने कवि हैं, जब देश में उदारीकरण और साम्प्रदयिकता का संकट भरपूर गहरा रहा था और जुलुम ये कि उसे
नीलोत्पल की कविताएं मानुष जीवन के ताप से भरी कविताएं हैं। जीवन के पकने की गंध जैसे फ़सल पकी हो या फल पके हों –
संजय कुमार शांडिल्य उन कवियों में हैं, जिन्होंने अभी आकार लेना शुरू किया है। हम सभी देख सकते हैं कि ऐेसे सब आकार बादलों के-से
कवि-मित्र जितेन्द्र श्रीवास्तव का साथ लेखन के शुरूआती दौर का साथ है। हम दोनों ने एक-दूसरे के रचनात्मक संघर्ष देखे और आजीविका के भी। हम