अनिल कार्की की नई कविताएं।
अनिल कार्की विकल, विकट और अंतहीन छटपटाहटों का कवि है। ये मनुष्य से आगे एक विचारवान मनुष्य होने की छटपटाहटें हैं, जो उसे समय में
अनिल कार्की विकल, विकट और अंतहीन छटपटाहटों का कवि है। ये मनुष्य से आगे एक विचारवान मनुष्य होने की छटपटाहटें हैं, जो उसे समय में
लोकोन्मुख आस्वाद की कविताएं :पांव तले की मिट्टी – आशीष कुमार “ कहा जा रहा है कविता खत्म हो रही है पर मुझे हर
विचित्र लेकिन बहुत सुन्दर है आज की, अभी की हिंदी कविता का युवा संसार। कितनी तरह की आवाज़ें हैं इसमें, कितने रंग-रूप, कितने चेहरे, अपार
इन ग़ज़लों में नए प्रयोग हैं। सायास हिंदीपन नहीं, बोली-बानी का अहसास ज़रूर है। हिंदी में ग़ज़ल कहना मुश्किल बात है इसीलिए स्थापित नाम भी
1. दुनिया के सारे धर्मग्रंथ कर दिए जाएं तहख़ानों के हवाले (भले ही कुछ समय के लिए) और पढ़े जाएं सिर्फ़ प्रेमग्रंथ…….. अवतारों के रूप
हरेप्रकाश उपाध्याय की कविताओं का इंतज़ार, अनुनाद के लिए बहुत पुराना इंतज़ार था। अब जाके पूरा हुआ। कठिन प्रखर प्रतिभा, सख़्त बोली, अक्खड़-फक्कड़ व्यवहार के
सुपरिचित कथाकार-कवि वंदना शुक्ल इस बार अनुनाद के लिए संगीत का अनुपम उपहार लायीं तो लगा किसी अमर प्रतीक्षा का सुफल मिला। कविता के कार्यकर्ता
अरुण श्री की कविताएं संभवत: मैंने पहली बार असुविधा ब्लाग पर पढ़ी और वे मुझे लगा कि इधर फेसबुक पर तैयार हो रही एक नई
विपिन चौधरी की लिखी जीवनी मैं रोज़ उदित होती हूं :माया एंजेलो का विद्रोही जीवन से एक अंश 1950 के दशक के अंत में माया
शैलजा पाठक की ये कविताएं मेल में मिलीं। इन्हें पढ़ना शुरू किया तो लगा एक अनगढ़ वृत्तान्त के कई सिरे खुलते जा रहे हैं। यह