अनुनाद

All Blogs

शैलजा पाठक की कविताएं

शैलजा पाठक की ये कविताएं मेल में मिलीं। इन्‍हें पढ़ना शुरू किया तो लगा एक अनगढ़ वृत्‍तान्‍त के कई सिरे खुलते जा रहे हैं। यह

Read More »

लोक और कविता – 1 /लोक की अवधारणा तथा लोकधर्म – जितेन्द्र कुमार

लोक की अवधारणा को बिलकुल नए अध्येता अब मिल रहे हैं। मेरे दो विद्यार्थी जितेन्द्र कुमार और शिव प्रकाश त्रिपाठी इसी सत्र में शोध के

Read More »

मैं सुनने आया कविता मुझे अख़बार सुनाया गया – कमल जीत चौधरी की नई कविताएं

कमल जीत चौधरी हिंदी की युवतर कविता में अब एक ख़ूब जाना-पहचाना नाम है। हिंदी की बड़ी पत्रिकाओं ने ख़ुद को जब बड़े या अधिक

Read More »

नागार्जुन का काव्‍य-व्‍यंग्‍य – शिवप्रकाश त्रिपाठी

वैद्यनाथ मिश्रा,यात्री या फिर  सबसे प्रसिद्ध  व लोकप्रिय नाम बाबा नागार्जुन  हिंदी एवम् मैथिली साहित्य के क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध नाम हैं|उनका साहित्य के क्षेत्र

Read More »

इतिहास जहाँ पर चुप हो जाता है, कविता बोलती हैै : केशव तिवारी के नए कविता संग्रह ‘तो काहे का मैं’ पर महेश पुनेठा का आलेख

कवि का रेखाचित्र : कुंवर रवीन्‍द्र लोकधर्मिता, न गाँव के दृश्य या घटनाओं को कविता में लाना भर है ,न पेड़-पत्ती-फूल की बात करना मात्र

Read More »

विमलेश त्रिपाठी की प्रेम कविताएँ

सुपरिचित युवा कवि-‍कथाकार विमलेश इन दिनों प्रेम कविताओं के संग्रह की तैयारी में हैं। ये कविताएं उसी संग्रह की पांडुलिपि से। ये कविताएं बताती हैं

Read More »

माँ का अंतर्द्वन्‍द्व – महेश पुनेठा की लम्‍बी कविता

मैं कविता में मनुष्‍यता के लम्‍बे आख्‍यानों का बहुत सम्‍मान करता हूं। साथी कवि महेश पुनेठा ने यह लम्‍बी कविता पढ़ने को भेजी तो उनसे

Read More »
error: Content is protected !!
Scroll to Top