अनुनाद

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मृत्‍युंजय की नई कविता

  मृत्‍युंजय की छवि के पी की नज़र में   अबकी कहाँ जाओगे भाई ! इनके घर में गिरवी रक्खा, उनके बंद तिजोरी इनने पुश्तैनी

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वंदना शुक्‍ल की नई कविताएं

स्‍मृतियां यादें जीवन के नन्हें शिशु हैं उम्र के साथ बढती जाती है उनमें नमी जैसे दरख्त की सबसे ऊंची पत्ती में आसमान भरता जाता

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हिन्दी दलित आत्मकथाओं में स्वानुभूति –जगदीश चन्‍द्र

        स्वानुभूति- हिन्दी दलित आत्मकथाओं में जो एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है वो है इन आत्मकथाओं में स्वानुभूति तथा सहानुभूति का इस पर

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गिरिराज किराड़ू की नई कविताएं

ये गिरिराज किराड़ू के साथ-साथ ‘मीर के अब्‍बू’ की भी कविताएं हैं,  यानी  आदमी हो रहे दरख्‍़त की। इन्‍होंने गिरिराज किराड़ू की कविता होने में

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के पी सिंह के कम्‍प्‍यूटर कविता वालपेपर – वीरेन डंगवाल की कविताएं और एक शुभकामना

मैंने दो पोस्‍ट पहले थकान और कुछ निजी वजहों से अनुनाद पर गतिविधियों के शिथिल रहने की बात कही थी, मेरा हाल वैसा ही है

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