अनुनाद

कथेतर गद्य

क्या तुम मेरे ऊपर व्यंग्य कर रहे हो? नहीं मैं तुम्हें गाली दे रहा हूं : पंकज मिश्र

हमारे वक़्त के ये यक्ष-युधिष्ठिर संवाद, जिन्हें इन्हीं में से चुराकर मैंने ऊपर एक शीर्षक दे दिया है। यक्ष पूछता है

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शिक्षक दिवस पर मेरे प्रिय समाज-राजनीति-साहित्‍य शिक्षक की याद

मेरे प्रिय समाज-राजनीति-साहित्‍य शिक्षक अपनी उधेड़बुनों में एक अज्ञानी कई तरह से उलझता है….मैं भी उलझता हूं….अगर ये उलझनें सच्‍ची हैं

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मोनिका कुमार की एक कविता और उस पर बहस : फेसबुक विशेष

कुछ दिन पहले प्रतिलिपि ब्‍लाग पर मोनिका कुमार की कुछ कविताएं प्रकाशित हुईं। कविताओं के साथ एक लम्‍बी टिप्‍पणी भी गिरिराज किराड़ू

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