अनुनाद

कविता

वो भारी आवाज़ अब कभी नहीं सुनाई देगी

भगवत  रावत  नहीं रहे। बहुत प्यार करने वाले  बुज़ुर्ग  कवि। फोन पर कितनी बातें होती थीं उनसे। वो भारी आवाज़ अब कभी नहीं सुनाई देगी. निकट की कविता का एक  पूरा इतिहास घूमने लगता है

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तिब्बत -उदय प्रकाश

नैनीताल के भोटिया मार्केट यानी तिब्बती मूल के लोगों के बाज़ार और तिब्बत को लेकर चल रहे आन्दोलन में उनकी भागीदारी

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आजकल

मेरा पालतू कुत्ता जो पहले चिडि़यों को हैरत से तका करता और भौंकता था घात लगाने लगा है आजकल उनपर छोटे

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अदम गोंडवी

थोड़ी ही बच रही हिंदी की समकालीन जनवादी कविता के प्रमुख कवि अदम गोंडवी के दुखद प्रस्थान से अनुनाद शोकसंतप्त है. ***

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यतीन्‍द्र मिश्र की कविता

इधर नवभारत टाइम्‍स का दीपावली अंक आया है। उसमें सम्मिलित यतीन्‍द्र की एक कविता और उनके कविकर्म पर दो आलोचकीय टिप्‍पणियां

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