नीलोत्पल की कविताएं
नीलोत्पल नीलोत्पल की कविता का अनुनाद को इंतज़ार था। तीन साल पहले मेरा ध्यान उनकी कविता की ओर गया। ये कविताएं
नीलोत्पल नीलोत्पल की कविता का अनुनाद को इंतज़ार था। तीन साल पहले मेरा ध्यान उनकी कविता की ओर गया। ये कविताएं
नाज़िम हिकमत(1902 – 1963 ) उम्मीद मैं कवितायेँ लिखता हूँ पर उनको कोई
देवीप्रसाद मिश्र का लेखन समकालीन हिंदी संसार की एक उपलब्धि है। उनके यहां काव्यभाषा का गद्य में घुल जाना कविता को
यादवेन्द्र जी अनुनाद के सच्चे संगी-साथी हैं। उन्होंने विश्वकविता से कुछ बहुत शानदार अुनुवाद अनुनाद को दिए हैं। वे अनुनाद के
बहुत प्रसन्नता और सन्तोष का विषय है कि हमारे प्रिय कवि-आलोचक पंकज चतुर्वेदी कोई साल भर के विराम के बाद ब्लाग
दोस्त रिजवानउस लड़की का क्याजो कर आई थी मुंह कालासुबह के उजास में ? भाई, वह है अबतीन बच्चों की अम्मातीन
चित्र यहां से साभार धागेनतिनकधिन – व्योमेश शुक्ल एक लड़का तबला बजाना सीख रहा है हारमोनियम पर बजते लहरे के साथ
फेसबुक पर कभी-कभी बहुत अच्छी कविताएं मिल जाती हैं। अशोक कुमार पांडेय के सौजन्य से यह कविता अभी मिली…जिसे अनुनाद पर
कात्यायनी हमारे समय की सुपरिचित और महत्वपूर्ण कवि हैं। उनकी ये कविता ‘चक दे’ की चकाचौंध से बहुत पहले की है। इस
अमित उपमन्यु ने अभी हाल में ही कविताएँ लिखना शुरू किया है. कुछ कविताएँ परिकथा के नवलेखन अंक में आई हैं