कविता: कवि-तान: कविता- न !: क-वितान – समकालीन प्रहसन का लेखा : अमित श्रीवास्तव
‘कविता लिखने के लिए कवि होना ज़रूरी नहीं। ’ ये ब्रह्म वाक्य मुझे एक ‘कविता: कल, आज, कल और परसों’ नामक
‘कविता लिखने के लिए कवि होना ज़रूरी नहीं। ’ ये ब्रह्म वाक्य मुझे एक ‘कविता: कल, आज, कल और परसों’ नामक
हमारे वक़्त के ये यक्ष-युधिष्ठिर संवाद, जिन्हें इन्हीं में से चुराकर मैंने ऊपर एक शीर्षक दे दिया है। यक्ष पूछता है
गंदे पोस्टकार्ड अविनाश मिश्र मेरी एकांतप्रियता का जन्म तब हुआ जब लोगों ने मेरी वाचाल त्रुटियों की प्रशंसा प्रारंभ की और
निराला की लम्बी कविता ‘राम की शक्तिपूजा’ की नाट्य प्रस्तुति के लिए सुपरिचित युवा कवि व्योमेश शुक्ल और रंगमंडल ‘रूपवाणी’ इन
विपिन चौधरी की लिखी जीवनी मैं रोज़ उदित होती हूं :माया एंजेलो का विद्रोही जीवन से एक अंश 1950 के दशक
यह अत्यन्त गम्भीर मसला है। अनुनाद के लिए सौरभ राय को मिले सूत्र सम्मान का विवरण और उनकी नई कविताएं मैंने
(इस लेख को मेल द्वारा भेजते हुए सूचित किया गया है कि इसे मूलत: जनसत्ता के लिए लिखा गया था किन्तु
प्रेमचंद की याद में व्योमेश शुक्ल का यह लेख प्रतिलिपि से साभार १ लमही वतन है। दूसरी जगहें गाँव घर मुहल्ला गली
मेरे प्रिय समाज-राजनीति-साहित्य शिक्षक अपनी उधेड़बुनों में एक अज्ञानी कई तरह से उलझता है….मैं भी उलझता हूं….अगर ये उलझनें सच्ची हैं
कुछ दिन पहले प्रतिलिपि ब्लाग पर मोनिका कुमार की कुछ कविताएं प्रकाशित हुईं। कविताओं के साथ एक लम्बी टिप्पणी भी गिरिराज किराड़ू