कविता समय- एक विमर्श की यादगार यात्रा
– प्रतिभा कटियार मिस्र, यमन, बहरीन की सुर्खियां घेरे हुए थीं. सड़कों पर लोगों का हुजूम. महापरिवर्तन का दौर. जनान्दोलन से बड़ी रूमानियत कोई
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१.१०.२००२ उर्वर कविताओं के अनेक डिम्ब बिखरे हैं सब तरफ़ जिज्ञासु, आतुर और श्रमशील पाठक की समझ के गतिमान शुक्राणु उसे
गिरदा पर एक स्मृतिलेख रामनगर में इंटरनेशनल पायनियर्स द्वारा आयोजित पहली अखिल भारतीय नाटक प्रतियोगिता(1977) के दौरान गिरीश तिवाड़ी (गिरदा) से
१९४८ में टी एस इलियट ने नोबेल पुरस्कार लेते हुए जो वक्तव्य दिया था, उसके एक महत्त्वपूर्ण अंश का अनुवाद हमारे
यह लेख जैसा कुछ समयांतर(जून 2008) में छपा हिंदी में भुला देने या उपेक्षा की हिंसक साहित्यिक राजनीति के शिकार हो
आज महमूद दरवेश की पहली बरसी पर उन्हें याद करते हुए प्रस्तुत है प्रसिद्ध ब्रिटिश कला समीक्षक-लेखक जॉन बर्जर का यह
1साहित्य की जिस एक चीज़ ने मुझे मेरे लड़कपन में सबसे ज्यादा आकर्षित किया था, जिस एक चीज़ से सबसे ज्यादा
व्योमेश शुक्ल की यह प्रश्नोत्तरी सापेक्ष के आलोचना महाविशेषांक से – दूसरी तथा अन्तिम किस्त आपकी नज़र में समकालीन लेखन की
व्योमेश शुक्ल की यह प्रश्नोत्तरी सापेक्ष के आलोचना महाविशेषांक से – पहली किस्त अपनी रचना-प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए। आलोचना में रुचि
मित्रो !सबद पे गीत चतुर्वेदी की डायरी के अंश प्रकाशित हुए हैं जिनमें उन्होंने कुछ ऐसी चीज़ों के बारे में बात