व्योमेश शुक्ल की एक कविता
व्योमेश शुक्ल ने अपनी कविता की ताक़त के बूते बहुत कम समय में पहचान बनाई है। उसके अपने बनाये बेहद जटिल और महान काव्यमूल्यों से
व्योमेश शुक्ल ने अपनी कविता की ताक़त के बूते बहुत कम समय में पहचान बनाई है। उसके अपने बनाये बेहद जटिल और महान काव्यमूल्यों से
विनोददास हमारे अग्रज कवि और चिंतक हैं। ख़ुशी की बात है कि मेरे अनुरोध पर उन्होंने अपनी कुछ कविताएं अनुनाद के लिए भेजी हैं। मेरे
कवि का वीडियो , विस्तृत जीवन परिचय तथा अन्य सभी जानकारी इस लिंक पर मौजूद हैं। आलिंगन दादी के बारे में बच्चे ने बतायाअंतिम दिनमृत्यु
एक दिन मैं मारा जाऊंगामरना नहीं चाहूंगा पर कोई चाकू घुस जाएगा चुपचाप मेरी टूटी और कमज़ोर बांयीं पसली के भीतर उसी प्यारभरे दिल को
यह कविता पहली बार यहाँ प्रकाशित हुई चित्रकृति : शिवकुमार गांधी(प्रतिलिपि से साभार) वहाँ फ़िलहाल कुछ लड़कियों के कपड़े टंगे हैं सूखने को और सपने
नेरूदा ने आलोचना को राजगीर का हाथ, इस्पात की रेखा, और सामाजिक तबकों की धड़्कन कहा था। यह आलोचना की जनपक्षधरता की और महज़ पुस्तकों
इस कविता का प्रथम प्रकाशन यहाँ हुआ है ! मैं उसेएक बूढ़ी विधवा पड़ोसन भी कह सकता थालेकिन मैं उसे सत्तर साल पुरानी देह में
यहाँ पंकज चतुर्वेदी की तीन कवितायें और प्रस्तुत हैं। हिंदी के कुछ समकालीन कवि( अग्रज भी और हमउम्र भी) उन्हें महज एक महत्वपूर्ण युवा आलोचक
चुनाव की परम पावन (परम पतित) बेला में पंकज चतुर्वेदी की इस कविता का हाथ लगना सुखद है। हमारी आज की राजनीति मुख्य रूप से
अनुवादक के पूर्वकथन के लिए यहाँ क्लिक करें ! अनंत आज आज फिर एक दोस्त के मरने की ख़बर आयी अंततः तो हम सभी को