
शुभा मिश्रा की कविताएं
धानरोपनी दिल नहीं लगा आज उसका धानरोपनी के गीतों में बबुआ की देह तप रही थी आते समय ज्वर की सिरप पिला आई

धानरोपनी दिल नहीं लगा आज उसका धानरोपनी के गीतों में बबुआ की देह तप रही थी आते समय ज्वर की सिरप पिला आई

धूप में धूप दूर दृष्टि के दूसरे छोर तक पसरी है, आग का एक समुद्र उग आया है खेतों खलिहानों में,

हिन्दी कविता में ईरान की स्त्री कवियों के स्वर सुनाई दे रहे हैं। अनुनाद पर पहले यादवेन्द्र ने कुछ महत्वपूर्ण अनुवाद हमारे लिए सम्भव किए

श्रीधर नांदेडकर मराठी साहित्य में ख्यातिप्राप्त नाम हैं। उनकी कविताओं का हिन्दी में अनुवाद कर पाठकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य सुनीता डागा ने किया
अनुनाद की वर्ष 2017-2018-2019 में ब्लॉग पर प्रकाशित सभी रचनाएं अब पीडीएफ़ रूप में उपलब्ध। अनुनाद संयुक्तांक 2017-2018-2019

अनुनाद ने हमेशा से ही अन्य भाषाओं की कविताओं में आवाजाही का संकल्प रखा और निभाया है। हमारे आर्काइव में हमारा यह संकल्प देखा जा

1. शिकारी की तरह आए तो प्रेम नहीं है! जाल बिछाए तो प्रेम नहीं है! आखिर यह मान लेने में क्या हर्ज़