
बढ़ता ही जाता पृथ्वी पर भयावह सन्नाटा : मोहन कुमार डहेरिया की कविताएं
वरिष्ठ कवि मोहन कुमार डहेरिया नब्बे के दशक में प्रकाश में आयी कवि-पीढ़ी के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं। इनकी कविताएं समय, राजनीति और साहित्य के किसी

वरिष्ठ कवि मोहन कुमार डहेरिया नब्बे के दशक में प्रकाश में आयी कवि-पीढ़ी के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं। इनकी कविताएं समय, राजनीति और साहित्य के किसी

वीरेन्द्र दुबे देश के जाने माने बालशिक्षा विशेषज्ञों में हैं। इस क्षेत्र में उनकी उम्र गुज़री है। मध्य प्रदेश से उत्तराखंड तक विस्तृत उनके कार्यक्षेत्र

गहन निराशा भी ताकतवर होती है सभ्यता के इस दौर

एक पियानोवादक की मृत्यु दूसरे जब जंग छेड़ रहे थे अथवा कर रहे थे अनुनय अमनके लिये, या जब पड़े
कविता लेखन पर निजी जीवन और अनुभवों का विशेष प्रभाव होता है, जब यही अनुभव लोक मानस से जुड़ जाते हैं, तब
अशोक कुमार की कविताओं में लोक का ठेठपन, उसकी पीड़ा, उसकी चुनौतियाँ, उसके निश्चल स्वप्न , समाज का खोखलापन और जन्मभूमि से प्रवासित होने
देवेश पथ सारिया के पास जीवनानुभवों का एक समृद्ध विस्तार है। भारत से ताईवान तक के रहवासी होने के अनुभव और धरती से अंतरिक्ष के
भूपेन्द्र बिष्ट लम्बे समय से कविता लिख रहे हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति समकालीन दृश्य में एक ख़ामोश और संकोची उपस्थिति रही है। दैनिक जीवन की
श्रीविलास सिंह ने विश्वकविता से बहुत महत्वपूर्ण अनुवाद हिन्दी में सम्भव किए हैं। हमेें कैरिबियाई कवि डेरेक वॉलकाट की दस कविताऍं मिली हैं। संसार में