अनुनाद

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कविता

कोंपलें नहीं फूट रहीं – डोगरी कवि ध्‍यान सिंह की कविताएं : अनुवाद एवं प्रस्‍तुति – कमल जीत चौधरी

डोगरी के कवि ध्‍यान सिंह की पंक्ति कोंपलें नहीं फूट रहीं , महज कविता की नहीं, सामाजिक जीवन और उसकी दशा-दिशा की भी टीस बनकर

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रोने से शरीर का अशुद्ध जल बाहर निकल जाता है – अनुष्‍का पाण्‍डेय की कविताएं

अनुष्का पाण्डेय की कविताएँ सीधे-सरल संसार के उतने ही सरल प्रश्‍नों से निकलती-उलझती कविताएं लगती हैं, किन्‍तु यह भी याद दिलाती चलती हैं कि हर

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बहुत अधिक मामूली लोगों में जो महानता छिपी होती है, वह हम देख नहीं पाते – जोशना बैनर्जी आडवाणी की कविताएं

जोशना बैनर्जी आडवाणी की कविताएं कई कहे-अनकहे, सुने-अनसुने कथानकों को सिरजती हुई अपनी कहन के लिए एक अलग तरह का शिल्‍प गढ़ती हैं। अंचल विशेष

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अपनी समझ के संग्रहालय को खंगालते हुये- ऋतु डिमरी नौटियाल की कविताएं

ऋतु डिमरी नौटियाल की कविताएं आज के मनुष्य-जीवन और जीवन-शैली में घटित हो रहे प्रसंगों और प्रश्नों को स्पर्श करते हुए उनका सरल उत्तर देती

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बढ़ता ही जाता पृथ्वी पर भयावह सन्नाटा : मोहन कुमार डहेरिया की कविताएं

वरिष्‍ठ कवि मोहन कुमार डहेरिया नब्‍बे के दशक में प्रकाश में आयी कवि-पीढ़ी के महत्‍वपूर्ण प्रतिनिधि हैं। इनकी कविताएं समय, राजनीति और साहित्‍य के किसी

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वीरेन्‍द्र दुबे की कविताऍं

वीरेन्‍द्र दुबे देश के जाने माने बालशिक्षा विशेषज्ञों में हैं। इस क्षेत्र में उनकी उम्र गुज़री है। मध्‍य प्रदेश से उत्‍तराखंड तक विस्‍तृत उनके कार्यक्षेत्र

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