मणिपुर की अद्वितीय मुक्केबाज कोम को संबोधित दो कविताएं – यादवेन्द्र
अपने रचनात्मक सहयोग के साथ यादवेन्द्र अनुनाद के सबसे निकट के साथी हैं। वे हमारी अनुनाद मंडली के सबसे वरिष्ठ साथी भी हैं, उन्हें मैं
अपने रचनात्मक सहयोग के साथ यादवेन्द्र अनुनाद के सबसे निकट के साथी हैं। वे हमारी अनुनाद मंडली के सबसे वरिष्ठ साथी भी हैं, उन्हें मैं
तुषार धवल तुषार हमारे समय का बहुत महत्वपूर्ण युवा कवि है। वो बेहद आत्मीय हमउम्र साथी है इसलिए चाहकर भी मैं उसके लिए सम्बोधन के
वंदना शुक्ला वंदना शुक्ला की ये कविताएं मुझे उनके मेल द्वारा मिलीं। इन कविताओं की कवि हिंदी के आभासी संसार के अलावा सभी प्रतिष्ठित
सल्वादोर डाली : गूगल इमेज से साभार नवीन सागर की कविता उनके प्रस्थान के बाद भी बची हुई है, बची रहेगी। मुझे बार-बार कहना पड़ता
मोनिका कुमार: फोटो जानकीपुल से मोनिका कुमार हिंदी के लिए बहुत नई कवि हैं। मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में अभी उनकी कविताएं शायद नहीं छपी हैं। उन्हें
मैंने यह पोस्ट बहुत पहले कबाड़खाना पर लगाई थी। इधर ‘कल के लिए’ का अदम विशेषांक पढ़ते हुए मुझे इस कविता की याद आई…सो अनुनाद
आसान नहीं विदा कहना – केशव तिवारी गद्य के इलाक़े में मेरी यात्रा अभी शुरू ही हुई और इस शुरूआत में मैंने कुछ समीक्षात्मक –
प्रेमचंद गांधी जयपुर में 26 मार्च, 1967 को जन्मे सुपरिचित कवि प्रेमचंद गांधी का एक कविता संग्रह ‘इस सिंफनी में’ और एक निबंध संग्रह ‘संस्कृति
मैं ब्लागपत्रिकाओं में लगातार रामजी तिवारी की कविताएं पढ़ता रहा हूं। उनकी कविताओं में बोली-बानी अलग है…ठेठ देशज संस्कार वाली। उनमें ईश्वर और मिथक-पुराणों का
नरेश चन्द्रकर मेरे प्रिय अग्रज कवि हैं। उनकी आवाज़ इतनी शान्त, गहरी और मद्धम है कि कम ही सुनाई देती है। हिंदी कविता के नाम