पंखुरी सिन्हा की कविताएं
बातों का पुलिंदा सब सच नहीं है, अभिलेखागार के कागजों में, प्रमाण सिर्फ कागज़ का होना है, उसकी बातों का सच नहीं, हज़ार चिट्ठियां हैं,
बातों का पुलिंदा सब सच नहीं है, अभिलेखागार के कागजों में, प्रमाण सिर्फ कागज़ का होना है, उसकी बातों का सच नहीं, हज़ार चिट्ठियां हैं,
अशोक कुमार पांडेय की ये कविता कल मिली….कई बार पढ़ी। जब कविता अर्थ से अभिप्रायों में चली जाती है तो उसे कई बार पढ़ना होता
कमल जीत चौधरी मेरे इंतज़ारों की कविता – अब तक इस वाक्य का प्रयोग कुछ चुनिन्दा अग्रजों की कवियों की कविता के लिए किया है
ये एक नौजवान कवि की कविताएं हैं, जिनमें उसकी उम्र छलकती-सी दीखती है। इतना उत्साह और हर जगह भागीदार होने का अहसास अपने समकालीन जीवन
आज कई महीने बाद अपने उचाट सूनेपन में मेरे क़दम अब तक स्थगित रखे गए फेसबुक की ओर बढ़ गए और वहां वो मिला, जिसकी
रात में इस रात में सितारों जैसे हज़ार हज़ार लोगों से मिलता हूं हिलता हूं अंदर
जयपुरवासी दुष्यन्त ऐसे कविसाथी हैं, जिनसे मेरा लम्बा रचनात्मक संवाद रहा है लेकिन अनुनाद अभी तक इस संवाद का हिस्सा नहीं बन पाया था। हमारे
शेरदा अनपढ़ की कविता पर अनिल कार्की की लम्बी टिप्पणी हम कितने आशावान और कितने निश्चित हैं अपने आने वाले दिनों को लेकर? जब पूरी दुनिया के
वरिष्ठ साहित्यकार दिविक रमेश से हमें अनुनाद के लिए उनकी ये कविताएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें समसामयिकता और उसकी अभिव्यक्ति के विविध रूप और हस्तक्षेप
फोन पर हुई बातचीत के बाद सुरेश सेन निशान्त ने स्नेहपूर्वक अपनी कुछ कविताएं भेजी हैं। वे इधर चर्चा में आए महत्वपूर्ण कवि हैं। अनुनाद