बर्तोल्द ब्रेख़्त की कविता / अनुवाद असद ज़ैदी – आनेवालों के नाम
फेसबुक पर काम करने का कोई ईनाम भी मिलेगा, कभी सोचा न था। पिछले दिनों अपनी पीढ़ी के कवियों को पढ़वाने के लिए बहुत टीस
फेसबुक पर काम करने का कोई ईनाम भी मिलेगा, कभी सोचा न था। पिछले दिनों अपनी पीढ़ी के कवियों को पढ़वाने के लिए बहुत टीस
अपने लिए तुम्हारे घर की तिमंजिली खिडकी से कूदती है और रोज भाग जाती है छिली कोहनियों और फूटे घुटनों वाली औरत ढूंढती है नीम का
मेरे प्रिय छात्र अनिल कार्की की वजह से मेरा ध्यान फेसबुक पर संदीप रावत की कविताओं की ओर गया। मैं उनके पिछले कुछ स्टेटस को
मृत्युजंय बहुत अलग-अलग शिल्पों में कविता सम्भव करने वाले अद्भुत युवा कवि हैं। वे भरपूर राजनीतिक हैं, उनकी कविता के उद्देश्य राजनीतिक हैं, जो दिनों
विस्थापन और ‘आत्म’बोध की दूसरी कथा अपनों में नहीं रह पाने का गीत उन्होंने मुझे इतना सताया कि मैं उनकी दुनिया से रेंगता आया मैंने
केशव तिवारी मेरे बहुत प्रिय कवि हैं, जिनकी कविता के महत्व पर बातचीत मुझे हमेशा हमारी आज की कविता के हित में बहुत ज़रूरी लगती
अनुनाद पर निरन्तर काम करते रहने का सुफल कभी-कभी यूं भी मिलता है जैसे मेरे प्रिय कविमित्र आशुतोष दुबे ने अपनी छह कविताएं अभी अचानक
विजय सिंह अपनी उत्कट लोक प्रतिबद्धता के कारण हिंदी कविता में एक सुपरिचित नाम हैं। उन्हें लिखते कई बरस हुए। उनके लिए अपना जिया हुआ
कमाल सुरेया (1931-1990) एक दिन स्त्री चल देती है चुपचाप …दबे पाँव कोई स्त्री रिश्तों को निभाने में सहती है बहुत कुछ ..मुश्किलें उसका दिमाग,दिल
गिरिराज के यहां कविता एक नाज़ुक विषय है, गो वो अकसर ख़ुद को कठोर कवि कहता पाया जाता है। मैंने पहले भी दो-तीन बार अनुनाद