अनुनाद

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पंखुरी सिन्‍हा की कविताएं

बातों का पुलिंदा सब सच नहीं है, अभिलेखागार के कागजों में, प्रमाण सिर्फ कागज़ का होना है, उसकी बातों का सच नहीं, हज़ार चिट्ठियां हैं,

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कमल जीत चौधरी की कविताएं

कमल जीत चौधरी मेरे इंतज़ारों की कविता – अब तक इस वाक्‍य का प्रयोग कुछ चुनिन्‍दा अग्रजों की कवियों की कविता के लिए किया है

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अरुणाभ सौरभ की कविताएं

ये एक नौजवान कवि की कविताएं हैं, जिनमें उसकी उम्र छलकती-सी दीखती है। इतना उत्‍साह और हर जगह भागीदार होने का अहसास अपने समकालीन जीवन

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मलय की दो कविताएं

रात में    इस रात में सितारों जैसे हज़ार हज़ार लोगों से मिलता हूं                  हिलता हूं अंदर

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दुष्‍यन्‍त की चार कविताएं

जयपुरवासी दुष्‍यन्‍त ऐसे कविसाथी हैं, जिनसे मेरा लम्‍बा रचनात्‍मक संवाद रहा है लेकिन अनुनाद अभी तक इस संवाद का हिस्‍सा नहीं बन पाया था। हमारे

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दिविक रमेश की कविताएं

वरिष्‍ठ साहित्‍यकार दिविक रमेश से हमें अनुनाद के लिए उनकी ये कविताएं प्राप्‍त हुई हैं, जिनमें समसामयिकता और उसकी अभिव्‍यक्ति के विविध रूप और हस्‍तक्षेप

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