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कमल जीत चौधरी की नई कविताएं
कमलजीत चौधरी कमल जीत चौधरी मेरे लिए अग्निशेखर के बाद कविता में जम्मू की एक अत्यन्त महत्वपूर्ण किन्तु अलहदा आवाज़ है। हिन्दी में सीमान्तों की
लहू बहने के ठीक पहले -मृत्युंजय की कविता
स्त्री संसार पुरुष कवियों की कविता में आता है तो अभिव्यक्ति में अपने साथ कई जोखिम लाता है, ऐसे ही जोखिमों का सफलता से सामना
पांच कविताएं : स्थायी होती है नदियों की याददाश्त , मुश्किल दिन की बात ,सुबह हो रही है ,किसी ने कल से खाना नहीं खाया है और सांड़
स्थायी होती है नदियों की याददाश्त कितनी बारिश होगी हर कोई पूछ रहा है कुछ पता नहीं हर कोई बता रहा है बारिश तो बारिश
अनिल कार्की की लम्बी कविता- नमक बोती औरतें
(अपनी इजा, कोजेड़ज्या, काकियों और अपनी भौजियों को जो जिन्दा है और उन आमाओं को जो पहाड़ जीते हुए शहीद हो गयीं – उनको जिन्होंने पहले पहल
कविता की टिहरी डूब गई
इधर कुछ समय से उत्तराखंड में तथाकथित विकास के प्रबल पक्षधर बनकर सामने आए मेरे बहुत प्रिय वरिष्ठ कवि लीलाधर जगूड़ी के लिए सादर तस्वीर: मनोज भंडारी-अनिल कार्की
टूटकर ही बनते हैं पहाड़ -भास्कर उप्रेती
भास्कर उप्रेती छह बरस पहले मि㨜ला एक युवा कवि-पत्रकार, जिससे समय के साथ मि㨜त्रता गाढ़ी होती गई। मैंने उसमें बहुत भावुक-संवेदनशील इंसान पाया। लेकिन उसकी
बर्तोल्द ब्रेख़्त की कविता / अनुवाद असद ज़ैदी – आनेवालों के नाम
फेसबुक पर काम करने का कोई ईनाम भी मिलेगा, कभी सोचा न था। पिछले दिनों अपनी पीढ़ी के कवियों को पढ़वाने के लिए बहुत टीस
हेमा दीक्षित की कविताएं
अपने लिए तुम्हारे घर की तिमंजिली खिडकी से कूदती है और रोज भाग जाती है छिली कोहनियों और फूटे घुटनों वाली औरत ढूंढती है नीम का
संदीप रावत की कविताएं
मेरे प्रिय छात्र अनिल कार्की की वजह से मेरा ध्यान फेसबुक पर संदीप रावत की कविताओं की ओर गया। मैं उनके पिछले कुछ स्टेटस को