अनुनाद

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वो भारी आवाज़ अब कभी नहीं सुनाई देगी

भगवत  रावत  नहीं रहे। बहुत प्यार करने वाले  बुज़ुर्ग  कवि। फोन पर कितनी बातें होती थीं उनसे। वो भारी आवाज़ अब कभी नहीं सुनाई देगी. निकट की कविता का एक  पूरा इतिहास घूमने लगता है आंखों के आगे। जानलेवा

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तिब्बत -उदय प्रकाश

नैनीताल के भोटिया मार्केट यानी तिब्बती मूल के लोगों के बाज़ार और तिब्बत को लेकर चल रहे आन्दोलन में उनकी भागीदारी को देखते हुए लगातार

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प्रेम के उद्दीप्‍त आलोक में कविता – ओम निश्‍चल

धनुष पर चिड़िया कवि: चंद्रकांत देवताले चयन व संपादन: शिरीष कुमार मौर्य प्रकाशक:शाइनिंग स्‍टार एवं अनुनाद उत्‍तराखंड मूल्‍य:रु.200 धीरे धीरे उम्र की छलॉंगें लगाते हुए

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हमारे साथ हमारे गिर्दा

इस वीडियो में गिर्दा होली नहीं गा रहे हैं …ये उनका अलग गीत है पर उनकी याद दिनों दिन बढती ही जाती है और वार-त्यौहार

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अंदाजों का गणित – राग तेलंग

रसोईघरों में तीन सौ साठ अंशों की व्यस्तता के फलक में हर लम्हा-हर एक छोटे से कोण में मौजूद दिखतीं स्त्रियाँ नमक-मिर्च, शक्कर, हल्दी-धनिया और

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आजकल

मेरा पालतू कुत्ता जो पहले चिडि़यों को हैरत से तका करता और भौंकता था घात लगाने लगा है आजकल उनपर छोटे पिल्ले से जवान होते

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अदम गोंडवी

थोड़ी ही बच रही हिंदी की समकालीन जनवादी कविता के प्रमुख कवि अदम गोंडवी के दुखद प्रस्थान से अनुनाद शोकसंतप्त है. *** काजू भुने पलेट में, व्हिस्की गिलास

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मनोज कुमार झा की कविताएँ

बहुत दिनों बाद किसी उपहार की तरह मनोज कुमार झा की कविताएँ अनुनाद को मिली हैं. युवा हिंदी कविता में बिलकुल नया मुहावरा रचती और

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