फकुन्दो कब्राल – अनुवाद तथा प्रस्तुति – यादवेन्द्र
पूरे लैटिन अमेरिका में बेहद सम्मानित 74 वर्षीय लोक गायक और लेखक फकुन्दो कब्राल की पिछले महीने बन्दूकधारी अपराधियों ने दिन दहाड़े गोली मार कर
पूरे लैटिन अमेरिका में बेहद सम्मानित 74 वर्षीय लोक गायक और लेखक फकुन्दो कब्राल की पिछले महीने बन्दूकधारी अपराधियों ने दिन दहाड़े गोली मार कर
चित्र गूगल से साभार मुझे नहीं पता मैं पहली बार कब रोया था हालांकि मुझे बताया गया कि पैदा होने के बाद भी मैं खुद
ओख्कर (अखरोट) छूकर देखा तुम्हारा दिल अखरोट के आकार का है जिसे चूमने के बाद पता चला कि अखरोट के नर्म गूदे की तरह सुस्वादु
1. साधो, भ्रष्टन के कंह लाज ! चाल चरित्र चित्र सब चकचक, चौचक चपल समाज कर्नाटक की कुञ्ज गलिन में, किलकत हैं बेल्लारी, येदुरप्पा के
एक सुखद आश्चर्य की तरह आज याद्वेन्द्र जी का मेल मिला और साथ मे यह कविता..अनुनाद के पाठक ज़रूर इसे पसन्द करेंगे… ____________________________________________ *** शिरीष,
प्रस्तुति – यादवेन्द्र पूरी कविता और इस पर बहस के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें … द पब्लिक एजेंडा के नवम्बर 2010 में प्रकाशित साहित्य विशेषांक में
विज्ञान के दरवाज़े पर कविता की दस्तक स्वर्गीय रघुवीर सहाय ने आज से करीब बीस साल पहले रिक्शे को केंद्र में रख कर एक कविता लिखी थी साईकिल
रीसम हेले अफ़्रीकी देश इरीट्रिया के सबसे लोकप्रिय कवि हैं — उनकी लोकप्रियता कविताओं की विषय वस्तु और लोक संस्कारों में रची बसी शैली के
पिछले अक्तूबर में चीन के कुछ इलाकों में तिब्बती भाषा के बोलने लिखने और पढ़ाये जाने पर जब सरकारी पाबन्दी लगा दी गयी तो नौजवानों
मेरे विभाग की अत्यन्त वरिष्ठ सहयोगी प्रोफेसर उमा भट्ट की अगुआई में ‘उत्तरा महिला पत्रिका’ काफी सालों से निकल रही है। उसका हर अंक संग्रहणीय