अनुनाद

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कविता समय- एक विमर्श की यादगार यात्रा

– प्रतिभा कटियार मिस्र, यमन, बहरीन की सुर्खियां घेरे हुए थीं. सड़कों पर लोगों का हुजूम. महापरिवर्तन का दौर. जनान्दोलन से बड़ी रूमानियत कोई नहीं होती. मैं उसी रूमानियत

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कनाडा की नेटिव कविता- हलिजो वेबस्टर: अनुवाद एवं प्रस्तुति -यादवेन्द्र

धराशायी होने तक का इन्तजार मैं जोर जोर से चिल्ला रही हूँ पर कोई नहीं है जो सुने मेरी बात मैं नाच रही हूँ निर्वस्त्र

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सभ्यता के उजाड़ कोनो में कवितायें बेआवाज़ पड़ी रहती हैं – बसंत त्रिपाठी की दो कविताएं

बेआवाज़ पत्तियों के झरने की आवाज़ की आवाज़ होती है हवा धीमी आवाज़ के साथ बहती है चूजे अण्डों से निकलकर मचाते हैं शोर फूलों

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अहमद फ़ोयेद नेगम की कविता – अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्र

1929 में एक पुलिसकर्मी के घर में जन्मे अहमद फोएद नेगम मिस्र के अत्यंत लोकप्रिय विद्रोही जनकवि हैं जिनके जीवन का बड़ा हिस्सा एक के

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फ्रांसीसी बास्क समुदाय का लोककाव्य : अनुवाद और प्रस्तुति – यादवेन्द्र

यूरोप की सबसे प्राचीन भाषा मानी जाने वाली बास्क भाषा अन्य इंडो यूरोपियन भाषाओँ से बिलकुल अलग है इस लिए एक वैज्ञानिक मत ये है

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महेश वर्मा की कविताएँ

हिसाब ब्लेड से पेंसिल छीलते में एक पूर्ण विराम भर कट सकती है उंगली लेकिन अश्लील होता बिल्कुल सफ़ेद काग़ज़ पर गिरना अनुस्वार भर भी

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