अनुनाद

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सभ्यता के उजाड़ कोनो में कवितायें बेआवाज़ पड़ी रहती हैं – बसंत त्रिपाठी की दो कविताएं

बेआवाज़ पत्तियों के झरने की आवाज़ की आवाज़ होती है हवा धीमी आवाज़ के साथ बहती है चूजे अण्डों से निकलकर मचाते हैं शोर फूलों

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अहमद फ़ोयेद नेगम की कविता – अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्र

1929 में एक पुलिसकर्मी के घर में जन्मे अहमद फोएद नेगम मिस्र के अत्यंत लोकप्रिय विद्रोही जनकवि हैं जिनके जीवन का बड़ा हिस्सा एक के

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फ्रांसीसी बास्क समुदाय का लोककाव्य : अनुवाद और प्रस्तुति – यादवेन्द्र

यूरोप की सबसे प्राचीन भाषा मानी जाने वाली बास्क भाषा अन्य इंडो यूरोपियन भाषाओँ से बिलकुल अलग है इस लिए एक वैज्ञानिक मत ये है

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महेश वर्मा की कविताएँ

हिसाब ब्लेड से पेंसिल छीलते में एक पूर्ण विराम भर कट सकती है उंगली लेकिन अश्लील होता बिल्कुल सफ़ेद काग़ज़ पर गिरना अनुस्वार भर भी

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तुमसे प्रेम करने के बाद

(1943 में जन्मी निकी जियोवानी अफ्रीकी मूल की अमरीकी कवयित्री हैं, इनकी कविताओं में नस्लीय गौरव और प्रेम की झलक है। निकी वर्जीनिया में अंग्रेज़ी

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विकी फीवर की दो कविताएँ – चयन, अनुवाद और प्रस्तुति: यादवेन्द्र

1943 में जनमी विकी फीवर अंग्रेजी में लिखने वाली स्कॉट्लैंड की प्रमुख कवि हैं,जिन्हें स्त्री विषयक कविताओं के लिए जाना जाता है।हांलाकि लम्बे रचना काल

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