जलसा-2 : देवीप्रसाद मिश्र
देवीप्रसाद मिश्र का लेखन समकालीन हिंदी संसार की एक उपलब्धि है। उनके यहां काव्यभाषा का गद्य में घुल जाना कविता को तो अलग रूपाकार देता
देवीप्रसाद मिश्र का लेखन समकालीन हिंदी संसार की एक उपलब्धि है। उनके यहां काव्यभाषा का गद्य में घुल जाना कविता को तो अलग रूपाकार देता
यादवेन्द्र जी अनुनाद के सच्चे संगी-साथी हैं। उन्होंने विश्वकविता से कुछ बहुत शानदार अुनुवाद अनुनाद को दिए हैं। वे अनुनाद के सहलेखक हैं पर ख़ुद
बहुत प्रसन्नता और सन्तोष का विषय है कि हमारे प्रिय कवि-आलोचक पंकज चतुर्वेदी कोई साल भर के विराम के बाद ब्लाग और नेट की दुनिया
व्योमेश शुक्ल समकालीन हिंदी कविता और आलोचना का सुपरिचित नाम है। कम लोग जानते हैं कि वे रंगकर्म में भी गहरी दिलचस्पी और भागीदारी रखते
‘हम बचे रहेंगे’ एक-दूसरे के आसमान में, आसमानी संतरंगों की तरह
दोस्त रिजवानउस लड़की का क्याजो कर आई थी मुंह कालासुबह के उजास में ? भाई, वह है अबतीन बच्चों की अम्मातीन कोठरी का मकां उसकासोती
चित्र यहां से साभार धागेनतिनकधिन – व्योमेश शुक्ल एक लड़का तबला बजाना सीख रहा है हारमोनियम पर बजते लहरे के साथ अपने उत्साही अपरिष्कार में
फेसबुक पर कभी-कभी बहुत अच्छी कविताएं मिल जाती हैं। अशोक कुमार पांडेय के सौजन्य से यह कविता अभी मिली…जिसे अनुनाद पर लगा देने का लोभ
कात्यायनी हमारे समय की सुपरिचित और महत्वपूर्ण कवि हैं। उनकी ये कविता ‘चक दे’ की चकाचौंध से बहुत पहले की है। इस कविता को बार-बार पढ़ता
अमित उपमन्यु ने अभी हाल में ही कविताएँ लिखना शुरू किया है. कुछ कविताएँ परिकथा के नवलेखन अंक में आई हैं और कुछ अन्य पत्रिकाओं