अशोक कुमार पाण्डेय की एक कविता
एक पुरस्कार समारोह से लौटकरवह सीकरी का दरबार ही था भरा-पूराऔर वहां संत ही थे सारेयह ग़र्मियों की एक ख़ुशनुमा शाम थी जब शहर के
एक पुरस्कार समारोह से लौटकरवह सीकरी का दरबार ही था भरा-पूराऔर वहां संत ही थे सारेयह ग़र्मियों की एक ख़ुशनुमा शाम थी जब शहर के
स्त्रियों की खिलखिलाहटेंधू धू कर जला देती हैं अन्याय के महल चौबारेऔर झूठी मनगढ़ंत कहानियाँइनमे तप कर सुन्दर सफ़ेद दीप्ति से निखर जाती हैं…ये संसदीय
मैं अनुनाद के लिए जिन कवियों की कविता हासिल करना चाहता रहा हूँ…संजय उनमें से एक हैं। इस बार काफ़ी संकोच के बाद अंततः उन्होंने
वेन गोग़ की पेंटिंग गूगल से साभार पुराने दोस्त याद आते हैं पुराने दोस्त स्मृतियों में रहते हैं मेरा जीवन तीन चौथाई स्मृतियों से बना
इस वर्ष फरवरी में ७३ वर्ष की आयु में स्तन कैंसर से १६ वर्षों तक जूझने के बाद प्रसिद्ध अमेरिकी अफ़्रीकी कवियित्री लूसिले क्लिफ्टन (१९३६-२०१०)का
गाज़ा में कविता है लापता गाज़ा में कविता है लापता हालाँकि उसके देखे जाने की छुटपुट और अपुष्ट सूचनाएं हैं एक कहता है कि उसे
अनुनाद के भले दिन लगे हैं। मनोज के बाद अब हमें गिरिराज की कविताएँ मिली हैं। एक आम शिकायत है कि गिरि की कविताओं में
मुझे बस उत्सव में शामिल कर लो तस्वीर और वक्तव्य प्रतिलिपि से साभार बाँसक ओधि उखाड़ि करै छी जारनि हमर दिन नहि घुरतकि हे जगतारिनि
साक्ष्य (विटनेस) की कविता पाठक को रूबरू कराती है उसकी व्याख्या से जुड़ी एक दिलचस्प समस्या से. हम अभ्यस्त हैं अपेक्षाकृत सरल श्रेणियों के: फ़र्क
यह नौजवान साथी प्रगतिशील हिंदी कविता की परंपरा से जीवनद्रव खींचता हुआ हमारे समय की कविता लिख रहा है। बिहार की धरती नागार्जुन, अरुण कमल