अनुनाद

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मनोज कुमार झा की कविताएँ

यह नौजवान साथी प्रगतिशील हिंदी कविता की परंपरा से जीवनद्रव खींचता हुआ हमारे समय की  कविता लिख रहा है। बिहार की धरती नागार्जुन, अरुण कमल

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कविता की काया को देखना- दूसरी किस्त /प्रस्तुति यादवेन्द्र

अब्बास कैरोस्तामी की ही एक और फिल्म है विंड विल कैरी अस, जो आधुनिक फारसी कविता की बेहद महत्वपूर्ण स्तम्भ फ़रोग फ़रोख्जाद की इसी शीर्षक

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कविता की काया को देखना – प्रस्तुति : यादवेन्द्र

अब्बास कैरोस्तोमी आधुनिक ईरानी सिनेमा के शिखर पुरुष माने जाते हैं,इतना ही नहीं सिनेमा विशेषज्ञ उन्हें आज दुनिया के दस सर्व श्रेष्ठ फिल्म निर्देशकों में

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औरतों की दुनिया में एक आदमी

वे दुखों में लिथड़ी हैंऔर प्रेम में पगीदिन-दिन भर खटीं किसी निरर्थक जांगर मेंबिना किसी प्रतिदान केरात-रात भर जगीं उनके बीच जाते हुएडर लगता हैउनके

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विश्व रंगमंच दिवस (२७ मार्च) पर विस्साव शिम्बोर्स्का की कविता

दुखांत मेरे लिए दुखांत नाटक का सबसे मार्मिक हिस्साइसका छठा अंक है जब मंच के रणक्षेत्र में मुर्दे उठ खड़े होते हैं अपने बालों का

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बख्तियार वहाब्ज़ादे : अनुवाद एवं प्रस्तुति- यादवेन्द्र

१९२५ में जन्मे बख्तियार वहाब्ज़ादे अजरबैजान के सबसे प्रसिद्द कवियों में शुमार किये जाते हैं.अजरबैजान की आज़ादी के लिए सोविएत संघ से अलग होने की

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आभा बोधिसत्व की एक कविता

सीता नहीं मैं तुम्हारे साथ वन-वन भटकूँगीकंद मूल खाऊँगीसहूँगी वर्षा आतप सुख-दुखतुम्हारी कहाऊँगीपर सीता नहीं मैंधरती में नहीं समाऊँगी। तुम्हारे सब दुख सुख बाटूँगीअपना बटाऊँगीचलूँगी

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