काले द्वीप : मार्टिन एस्पादा
काले द्वीप दारियो के लिए इएला नेग्रा* मेंनेरुदा की कब्र और बगीचे में पड़े लंगर के बीचउस आदमी ने, जिसके हाथ पत्थर तोड़ने वालोंजैसे थे,
काले द्वीप दारियो के लिए इएला नेग्रा* मेंनेरुदा की कब्र और बगीचे में पड़े लंगर के बीचउस आदमी ने, जिसके हाथ पत्थर तोड़ने वालोंजैसे थे,
(दुनिया में अनाचार और अनाचारियों की उपस्थिति कभी कभी किसी कवि को कितना क्रोधित, हताश और क्षुब्ध करती है, इसका एक भीषण उदाहरण व्योमेश द्वारा
कविता इसलिए कि मेरे तलवे मेरी माँ जैसे हैंजन्नत है माँ के क़दमों तले -मुहम्मद साहब और ताज्जुब कर रही हूँ मैंकि अपने पैरों पर
हिन्दी कविता में इलाहाबाद सबसे ज़्यादा है तो वीरेन डंगवाल की कविता में। उनके हर संग्रह में यह शहर पूरी विकलता से पुकारता है। उनकी
पारुल एक समर्थ और लोकप्रिय ब्लोगर हैं। वे झारखंड में रहती हैं…… …पारूल…चाँद पुखराज का…… किसी परिचय का मुहताज नहीं। मैंने यहाँ बहुत अच्छा संगीत
वे रहे, हू ब हू वैसे ही, जैसे वे थे उन्होंने चांद को पूजा – लेकिन थोड़ा कम उन्होंने टोकरियां बनाईं लकड़ियों कीगीत और धुनों
आज दोपहरमेरे जीवन के भीतर एक औरत चली जा रही थीगुस्से मेंअपने चार साल के बच्चे के साथ बच्चे के कंधे पर बस्ता थाबस्ता चार
अंगारा मेरी ख्वाहिश– सारा शगुफ्ता इज्जत की बहुत सी किस्में हैंघूंघट, थप्पड़, गंदुमइज्जत के ताबूत में कैद की मेखें ठोंकी गई हैंघर से लेकर फुटपाथ
हम गुनहगार औरतें किश्वर नाहीद ये हम गुनहगार औरतें जो अहले-जुब्बा की तमकनत से न रोआब खोयें न जान बेचें न सर झुकायें न हाथ
बारह फरवरी 1983 सईदा गजदार (पाकिस्तान में कानून-ए-शहादत के तहत किसी अदालत में औरतों की गवाही का कोई खास मूल्य नहीं है. 12 फरवरी 1983