बेट्सी का क्या कहना है : पैट्रीशिया स्मिथ
बेट्सी का क्या कहना है 1965 में हरिकेन बेट्सी ने बहामा और दक्षिण फ्लोरिडा से होकर लुइज़िआना तट पहुंचकर न्यू ओरलेंस को जलमय कर
बेट्सी का क्या कहना है 1965 में हरिकेन बेट्सी ने बहामा और दक्षिण फ्लोरिडा से होकर लुइज़िआना तट पहुंचकर न्यू ओरलेंस को जलमय कर
कुछ बातरतीब बातों की एक बेतरतीब पड़ताल हर युवा कवि अपनी रचना और विचार-प्रक्रिया में ख़ुद को पूर्वज कवियों से साझा करता है। मेरे लिए
(अग्रज राजेश जोशी को विनम्रता और विश्वास के साथ …..ये दाग़ दाग़ उजाला ये शबगज़ीदा सहर को याद करते हुए)इसी रात में घर है सबकाजो
प्रेमीगौरैये का वो जोड़ा हैजो समाज के रौशनदान मेंउस समय घोसला बनाना चाहते हैंजब हवा सबसे तेज बहती होऔर समाज को प्रेम परउतना एतराज नहीं
काम क्या होता है बारिश में खड़े-खड़े इंतज़ार कर रहे हैं हम फोर्ड हाइलैंड पार्क की लम्बी कतार में लगे हुए. काम के लिए.
यह चित्र कवि द्वारा सम्पादित-प्रकाशित लघु पत्रिका का है उपस्थित तो रहे हम हर समारोह में अजनबी मुस्कराहटों और अभेद्य चुप्पियों के बीच अधूरे पते
मैं हूँ निदा बसीजी* की गोली मेरे दिल में फंसी रहने दो करो मेरे खून में सिजदा और चुप भी हो जाओ, बाबा – -मरी
अपनी सरस्वती की अंदरूनी ख़बर और उस पर कड़ी से कड़ी नज़र इस ज्ञान निर्भर युग में हरेक को रखनी चाहिए जिन्होंने मनुष्य जाति के
कवि-साथी गीत की लम्बी कहानियों पर पिछले दिनों चले उतने ही लम्बे आलाप में गिरह की तरह प्रस्तुत है उसकी एक शानदार कविता, जो मुझे
घर के लिए टोटके पानक्वा* दरवाज़े और आवाज़े शाम कीआशिक़ों की छुपन हराम कीयह जंगल नहीं शर्त साहित्य कीऔर नहीं तो आएगा सूरजआएगा सूरजआएगा सूरज