विशाल श्रीवास्तव की कविताएँ ….
विशाल बहुत दिनों बाद अपनी चुप्पी तोड़ कर संबोधन में विष्णु नागर पर एक लेख और परिकथा में कुछ कविताओं के साथ दिखाई दिया है….मेरे
विशाल बहुत दिनों बाद अपनी चुप्पी तोड़ कर संबोधन में विष्णु नागर पर एक लेख और परिकथा में कुछ कविताओं के साथ दिखाई दिया है….मेरे
वियतनामी भाषा में चूमना मेरी दादी ऐसे चूमती हैजैसे पिछवाड़े के आँगन में बम हों फूट रहे,रसोईघर की खिड़की से होकर जहाँपुदीना और चमेली अपनी
बस की लय को पकड़ते हुए ये बस दो रेगिस्तानी जिला मुख्यालयों को जोडती हैजो दिन में शहर और रात में गाँव हो जाते हैसुबह
फ्रेम एक भरी पूरी उम्र लेकरदुनिया से विदा हुई दादी के बारे मेंसोचता है उसका पोताबड़े से फ्रेम में उसके चित्र को देखता। विस्तार में
घर गृहस्थी में धंसता पुराना प्रेम पत्र (एक काव्यकथा) ” श्री गोपीवल्लभ विजयते” बम्बोई(तिथि अस्पष्ट) प्यारी सुगना, मधुर याद. श्री कृष्ण कृपा से मैं यहाँ
आत्मकथ्य इन कविताओं में हिमालय का घूमंतू जीवन है. हिमालय के भीतर और ट्रांस हिमालय के आदिम समुदायों में दो तरह की जीवन धाराएं हैं
होमलैंड सिक्योरिटीघंटे दर घंटे दिन प्रतिदिन एअरपोर्ट सुरक्षाकर्मी खड़ी रहती है एक्सरे मशीन के पास बगल से गुज़रते भूतों को मॉनिटर पर देखते हुए तह
एक पुरस्कार समारोह से लौटकरवह सीकरी का दरबार ही था भरा-पूराऔर वहां संत ही थे सारेयह ग़र्मियों की एक ख़ुशनुमा शाम थी जब शहर के
स्त्रियों की खिलखिलाहटेंधू धू कर जला देती हैं अन्याय के महल चौबारेऔर झूठी मनगढ़ंत कहानियाँइनमे तप कर सुन्दर सफ़ेद दीप्ति से निखर जाती हैं…ये संसदीय
मैं अनुनाद के लिए जिन कवियों की कविता हासिल करना चाहता रहा हूँ…संजय उनमें से एक हैं। इस बार काफ़ी संकोच के बाद अंततः उन्होंने