अनुनाद

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बोधिसत्व

बोधिसत्व की ये कविता उनके पहले संकलन से है और आप देख सकते हैं कि वैश्विक स्तर पर आज कितनी प्रासंगिक है। ऐसी ही कुछ

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लीलाधर जगूड़ी

सबसे पहले ये कविता कबाड़खाना पर अशोक ने लगाई। मैंने इसे पढ़ा और फिर जगूड़ी जी से फोन पर बात हुई। इसे अनुनाद पर लगाने

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टामस ट्रांसट्रोमर

अधबना स्वर्ग हताशा और वेदना स्थगित कर देती हैं अपने -अपने काम गिद्ध स्थगित कर देते हैं अपनी उड़ान अधीर और उत्सुक रोशनी बह आती

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येहूदा आमिखाई

आंखों की उदासी और एक सफ़र की तफसील एक अँधेरी याद है जिस पर चीनी के बुरे की तरह बिखरा हुआ है खेलते हुए बच्चों

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अंकुर मिश्र

ये स्मृति है एक अंकुर की जिसे बड़ा पेड बनना था लेकिन अब उसके अंकुराने के कुछ प्रमाण ही शेष हैं। उसके नाम से मुझे,

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हंस मानूस इंजेंत्सबरजर

खुशीवह नहीं चाहतीकि मैं उसके बारे में कुछ बोलूंउसे कागज पर नहीं उतारा जा सकेगाऔर न हीउसके बारे में कोई भविष्यवाणी ही की जा सकती

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कू सेंग

अब बच्चा अब बच्चाकुछ देख रहा हैकुछ सुन रहा है कुछ सोच रहा है क्या वह देख रहा हैउस तरह की चीज़ों को जैसी देखी

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ईरानी कविता – फरूग फरूखजाद

ईश्वर से मुखामुखी मेरी चमकती आंखों से दूसरी पर भाग जाने कि आतुरता छीन कर उन्हें सिखालाओ पर्दा करना उन चमकीली आंखों से हे ईश्वरहे

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टामस ट्रांसट्रोमर

स्मृतियां मुझ पर निगाह रखती हैंजून की एक सुबह यह बहुत जल्दी है जागने के लिए और दुबारा सो जाने के बहुत देर हो चुकी

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येहूदा आमीखाई

प्रेम की स्मृतियाँ १ – छवि हम कल्पना नहीं कर सकते कि कैसे हम जियेंगे एक दूसरे के बिना ऐसा हमने कहा और तब से

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