
निशाना लगाउण दी सही जगह नहीं है मनुक्खी देह/ स्वामी अंतर नीरव की कविताएं
बीहड़, अघोर और प्यारे कवि स्वामी अंतर नीरव की नेटिविटी तो क्राॅस फायरिंग के लिए बदनाम इलाक़े पुंछ सेक्टर

बीहड़, अघोर और प्यारे कवि स्वामी अंतर नीरव की नेटिविटी तो क्राॅस फायरिंग के लिए बदनाम इलाक़े पुंछ सेक्टर

चन्दन कुमार की कविताएं अटपटे सामाजिक बंधनों, दुर्व्यवस्थाओं और खोखलेपन से लिथड़े समाज के प्रति अन्तर्मन की छटपटाहट को व्यक्त करती

बकरी चराती लड़की धूप उतर जाती है उसके कपड़ो पर ओढ़नी बनाकर ढ़क लेती है धूप से अपनी देह को

हिमांशु की कविताएं अपने आस-पास बिखरे लोक की भावनाओं को उसी के डिक्शन में अभिव्यक्त करती हैं, जहां

दीप्ति कुशवाह की ये कविताएं, शोर से बहुत दूर पाठक को अपने भीतर के एकांत में ले जाती हैं। निरन्तर बाहर

योगेन्द्र पांडेय की कविताएं प्रकृति, प्रेम, सौन्दर्य, आशा-निराशा, जीवन दर्शन के बीच विचरती रहती हैं। समकालीन कविता संसार में ये

शैलेन्द्र चौहान की कविताएं वैश्विक स्तर पर व्याप्त विषमताओं से व्याकुल कवि मन को दर्शाती हैं। चारों ओर फैले कुहासे

कुँवर रवीन्द्र सिंह की कविताएं पहाड़ की सड़कों की तरह मोड़दार हैं। वैश्विक दृश्यों में चलती हुई, अचानक से संवेदनाओं में

ज्योतिकृष्ण वर्मा की ये कविताएं आकार में छोटी और कहन में बड़ी हैं। हमारे आस-पास के रूपकों को बरतते हुए वे

अनामिका अनु की कविताओं का स्वर अलहदा है। उनकी एकान्तिक अनुभूतियों में भी एक अलग तरह की सामूहिकता है, जो पाठक