अनुनाद

कविता

कुछ लिखने की ख़ातिर लिख लेना यूँ कब कविता कहलाता है – विपिन ध्‍यानी की कविताऍं

पहाड़ी औरतें आँखें छलकी ही रहती हैं उबाल पर रहता है कलेजा उनका पहाड़ी औरतें एक बड़े दरख़्त की मानिंद झुकी

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राजेश जोशी, महेश पुनेठा और प्रदीप सैनी की कविताओं का अनुवाद / हर्ष काफर

गुरूत्‍वाकर्षण न्यूटन जेब में रख लो अपना गुरूत्वाकर्षण का नियमधरती का गुरूत्वाकर्षण ख़त्म हो रहा है । अब तो इस गोल-मटोल

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