विश्व रंगमंच दिवस (२७ मार्च) पर विस्साव शिम्बोर्स्का की कविता
दुखांत मेरे लिए दुखांत नाटक का सबसे मार्मिक हिस्साइसका छठा अंक है जब मंच के रणक्षेत्र में मुर्दे उठ खड़े होते
दुखांत मेरे लिए दुखांत नाटक का सबसे मार्मिक हिस्साइसका छठा अंक है जब मंच के रणक्षेत्र में मुर्दे उठ खड़े होते
कविता की किताबकल की सुबह के बारे में कल वाले कल के पहले वाले कल ही सोच लिया जाना चाहिए यह
यह मेरे पिता की कविता है, कमाल की बात ये कि इसे उन्होंने 63 वर्ष की उम्र में लिखा है। उनके
1 हवा है एक अंधी माँ लाशों के ऊपर सेलड़खड़ाती गुज़रती कफ़न भी नहींबादलों को बचाओ तो सही मगर कुत्ते हैं
१९२५ में जन्मे बख्तियार वहाब्ज़ादे अजरबैजान के सबसे प्रसिद्द कवियों में शुमार किये जाते हैं.अजरबैजान की आज़ादी के लिए सोविएत संघ
सीता नहीं मैं तुम्हारे साथ वन-वन भटकूँगीकंद मूल खाऊँगीसहूँगी वर्षा आतप सुख-दुखतुम्हारी कहाऊँगीपर सीता नहीं मैंधरती में नहीं समाऊँगी। तुम्हारे सब
नवनीता देवसेन राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाषा और साहित्य के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और आदरणीय नाम है. यह उनकी जबर्दस्त बहुआयामी
इस पोस्ट के साथ प्रतिभा कटियार अनुनाद की टीम का हिस्सा बन रही हैं। अनुनाद परिवार की ओर से मैं उनका
अनुवाद एवं प्रस्तुति : यादवेन्द्र तुर्की के विश्व प्रसिद्द कवि नाज़िम हिक़मत की ये बेहद चर्चित युद्ध विरोधी कविता हिरोशिमा पर
कुबेरदत्त समकालीन हिन्दी कविता के एक सुपरिचित और आत्मीय सहभागी है। उन्होंने दूरदर्शन के लिए लगातार साहित्य के कई ऐसे कार्यक्रम