व्योमेश शुक्ल की एक कविता
व्योमेश शुक्ल ने अपनी कविता की ताक़त के बूते बहुत कम समय में पहचान बनाई है। उसके अपने बनाये बेहद जटिल
व्योमेश शुक्ल ने अपनी कविता की ताक़त के बूते बहुत कम समय में पहचान बनाई है। उसके अपने बनाये बेहद जटिल
विनोददास हमारे अग्रज कवि और चिंतक हैं। ख़ुशी की बात है कि मेरे अनुरोध पर उन्होंने अपनी कुछ कविताएं अनुनाद के
कवि का वीडियो , विस्तृत जीवन परिचय तथा अन्य सभी जानकारी इस लिंक पर मौजूद हैं। आलिंगन दादी के बारे में
एक दिन मैं मारा जाऊंगामरना नहीं चाहूंगा पर कोई चाकू घुस जाएगा चुपचाप मेरी टूटी और कमज़ोर बांयीं पसली के भीतर
यह कविता पहली बार यहाँ प्रकाशित हुई चित्रकृति : शिवकुमार गांधी(प्रतिलिपि से साभार) वहाँ फ़िलहाल कुछ लड़कियों के कपड़े टंगे हैं
इस कविता का प्रथम प्रकाशन यहाँ हुआ है ! मैं उसेएक बूढ़ी विधवा पड़ोसन भी कह सकता थालेकिन मैं उसे सत्तर
यहाँ पंकज चतुर्वेदी की तीन कवितायें और प्रस्तुत हैं। हिंदी के कुछ समकालीन कवि( अग्रज भी और हमउम्र भी) उन्हें महज
चुनाव की परम पावन (परम पतित) बेला में पंकज चतुर्वेदी की इस कविता का हाथ लगना सुखद है। हमारी आज की
अनुवादक के पूर्वकथन के लिए यहाँ क्लिक करें ! अनंत आज आज फिर एक दोस्त के मरने की ख़बर आयी अंततः
कवि का परिचय कू सेंग का जन्म सीओल में 1919 में हुआ और वहीं 11 मई 2004 में उनका देहान्त हुआ।