अनुनाद

कविता

फिलीस्तीनी-अमरीकी कवि सुहीर हम्माद की कविता – चौथी तथा अंतिम किस्त / चयन, अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेंद्र

अमरीका मेंअभी इस वक्त आप जहां खड़े हैंवह जगह आपकी चुराई हुई हैकारण चाहे जो भी रहा हो – अभी इस

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फिलीस्तीनी-अमरीकी कवि सुहीर हम्माद की कविता – तीसरी किस्त / चयन, अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेंद्र

क्या करूंगी मैं(अरब देशों को युद्ध की आग में झोंकते अमरीकी प्रशासन को सम्बोधित) मैं थिरकूंगी नहीं तुम्हारी रणभेरी परमैं अपनी

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फिलीस्तीनी-अमरीकी कवि सुहीर हम्माद की कविता – दूसरी किस्त / चयन,अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेंद्र

हादसे के बाद पहले शब्द(11 सितम्बर 2001 के वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के तत्काल बाद लिखी लम्बी कविता के

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फिलीस्तीनी-अमरीकी कवि सुहीर हम्माद की कविता : चयन, अनुवाद तथा प्रस्तुति : यादवेन्द्र / पहली किस्त

जार्डन के एक शरणार्थी शिविर में 1973 में जन्मी सुहीर हम्माद अपने बचपन का कुछ समय बेरूत में फिलीस्तीनी सिविल वॉर

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रात में शहर

दिन की सबसे ज़्यादा हलचल वाली जगहें हीसबसे ज़्यादा खामोश हैं अब चौराहे पर अलाव जलायेपान की दुकान के बन्द होते

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मनमोहन की कविताएँ

स्मृति में रहना स्मृति में रहना नींद में रहना हुआ जैसे नदी में पत्थर का रहना हुआ ज़रूर लम्बी धुन की

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