दहलीज़ १: ‘बेर्टोल्ट ब्रेख्त की एक कविता-‘निर्णय के बारे में’: अनुवाद – नीलाभ अश्क
( कलात्मक सृजन को किस तरह उत्कृष्ट, सार्थक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है ; इस सन्दर्भ में यह एक बेमिसाल
( कलात्मक सृजन को किस तरह उत्कृष्ट, सार्थक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है ; इस सन्दर्भ में यह एक बेमिसाल
मेरा किया हुआ यह अनुवाद अशोक पांडे और उससे दोस्ती के उन विरल दिनों के लिए, जब उसने मुझे येहूदा आमीखाई
थॉमस मैक्ग्रा अमेरिकी साहित्य के सर्वाधिक उपेक्षित कवियों में हैं. साहित्यिक मठाधीशों ने रैडिकल वामपंथी विचारों वाले इस कवि को कभी
(ईरान में दमनकारी धार्मिक कट्टरवादियों के खिलाफ़ आंदोलित जनसमूह) ईरान में उभरे जनआक्रोश और इसका दमन करने के तानाशाही रवैये को
जिन्होंने दुख का स्वाद नहीं चखा उन पर दुख टूट पड़ें जो बिछुड़ने के दर्द को नहीं समझते उनके घर बह
आज तक मैंने जितनी भी प्रेम-सम्बन्धी कविताएँ पढ़ी हैं——-और ज़ाहिर है कि मेरे पढने की बड़ी सीमा है, फिर भी—–उनमें जर्मन
धातुएंसूर्य से अलग होकर पृथ्वी का घूमना शुरू हुआ शुरू हुआ चुंबकत्व धातुओं की भूमिका शुरू हुई धातु युग से पहले
कवि के परिचय और अनुवादक के पूर्व कथन के लिए यहाँ क्लिक करें ! ख़ाली टोकरियां भोर होते होतेदिखाई पड़ती हैं
सादी यूसुफ़ की कविता (अनुवाद : अशोक पाण्डे) फ़कीर एक रात बीतने ही वाली थी जब कवियों ने प्रस्थान किया एक-एक
(`ज़हरीली हवा` से) ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा। दिल के फफोलों से भरी किस-किसके नालों से भरी ख़ामोश