अनुनाद

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कहानी

मकान मालकिन (रोऑल्ड ढल)/हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह

बिली वीवर लंदन से अपराह्न वाली धीमी गति की रेलगाड़ी से, रास्ते में स्विंडन में गाड़ी बदलता हुआ, यात्रा करके आया था। जिस समय वह

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कविता

सफेद धुआं बन जाने से पहले, वह जी लेना चाहता हो हर रंग/  रंजना जायसवाल की कविताऍं

      सेमल का फूल        चैत के महीने में   बिखरे घमाते    सेमल के फूल    अलसाये उनींदे   फिर भी मुस्कुराते   सेमल के

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कविता

मिलती रही मंज़िलों की खबर ग़म-ए- दौराँ की उदासियों से भी/शुभा द्विवेदी की कविताएं

    कुछ सीखें बच्‍चों की बड़ों के लिए                   कितना कुछ बचा लेते हैं ये नन्हे-नन्हे हाथ: धरती भर मानवता अंबर भर संवेदनाएँ वसंती

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कविता

डाली पर झुका गुलाब तुम्हारी स्मृति में खिला है/ सीमा सिंह की कविताएं

      आश्‍वस्ति                   बसंत के माथे पर खिलते फूलों को देख  लौट लौट आती हैं तितलियाँ  जबकि पूस की रातों में जुगनू नहीं लौटते  ऋतुएँ

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समाज और संस्कृति

कुमाउनी लोक-साहित्य में घुघुत- संजय घिल्डियाल

पाश्चात्य ज्ञान मीमांसा मुख्य रूप से सामाजिक परिदृश्य तथा प्राकृतिक क्षेत्र के मध्य विरोध पर आधारित है।1 ऐसा विरोध पारिस्थितिक परिप्रेक्ष्य को नितांत रूप से

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