अनुनाद

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कहानी

आशियाना/ पूजा गुप्‍ता

आनन-फानन में रामेश्वरी ने अपना सामान बांध लिया और चलने को तैयार भी हो गई। गुस्से की इन्तहा इतनी थी कि मुंह से ना एक

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कविता

सदा से ही तमाम जीवनों के लिए अपना जीवन जीती रही है इजा/   गिरीश अधिकारी  की कविताऍं   

     लेसू रोटियां      उनदिनों जब  इजाके पास मडुवा था  औरमेरे पास थी एक जि़द कि गेहूँकी ही रोटी खानी है  तबपदार्पण हुआ इन पहाड़ों में 

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आलोचना / समीक्षा

समय की विकृतियों का दस्तावेज़/ श्रीकृष्‍ण नीरज

बहुत ही कम समय में अपनी पहचान बनाने वाले कवि जावेद आलम खान अक्सर अपनी कविताओं में समय से सवाल करते हैं। यह विविध विद्रूपताओं

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आलोचना / समीक्षा

हिन्‍दी ग़ज़ल में अंग्रेजी के तत्‍व/डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री

    हिंदी भारत ही नहीं विश्व की एक महत्वपूर्ण संवाद की भाषा है.एक भाषा के साथ यह हमारी अस्मिता और सांस्कृतिक मूल्यों की निशानी

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कविता

मन इच्छाओं का ज़ख़ीरा है देह उसके लालसाओं के बोझ से दबा मासूम/सुमन शेखर की कविताएं

   बिना व्‍याकरण के बोली जाने वाली भाषा हो तुम      तुम इतनी दूर रहीं कि कुछ भी कहा नहीं जा सकता तुम रहीं इतने पास

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कविता

मिट्टी से रोटी नहीं न बनती  खाली चूल्हा बनता है/  इरा श्रीवास्‍तव की कविताएं

   ठूंठ      पिता के जाने के बाद उनकी अनुपस्थिति का अहसास सबसे अधिक कही नुमाया हुआ तो वो मां का सूना माथा था    बैठक

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कविता

अब वे प्रेम के मकबरे बन चुकी हैं/स्‍वप्‍निल श्रीवास्‍तव  की कविताऍं 

   अगर      अगर भोजन करते हुए तुम्हें  इस बात की शर्म आए कि दुनिया में  करोड़ों लोग भूखे हैं  तो समझ लो कि तुम्हारे भीतर 

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