अनुनाद

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कथेतर गद्य

स्‍मरण विष्‍णु खरे –  कृष्‍ण कल्‍पित / अविनाश मिश्र

     कृष्‍ण कल्‍पित (१) केदारनाथ सिंह की अनुकृति करने की कोशिश में जितने युवा कवि नष्ट हुये उससे कुछ अधिक ही विष्णु खरे की कविता

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कविता

उलटबांसियों से पगा है यह क्षणिक जीवन/मंजुला बिष्‍ट

   सखी-संवाद     एक सधन्यवाद पत्र सखी!जितना समझी हूँ अब तलकसंसार में सुख-दुःख की आदी परम्परा रही है,सुख अपने भीतर गिरकर उन्मादी होते हैंतो,दूसरों के भीतर बरसकर

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कविता

तुम्‍हारे अंदर कौन खामोश बैठा कविता लिखता है/राकेश रोहित 

                             मॉं की स्‍मृति में     (1)दुख की लंबी उड़ान के बादकहाँ लौटती है आत्माएँकहाँ रीत जाता हैइच्छा के अक्षय पात्र में सिमटा

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कथेतर गद्य

हिन्‍दी साहित्‍य और न्‍यू मीडिया/ श्रीविलास सिंह से मेधा नैलवाल का साक्षात्‍कार

मेधा : हिंदी साहित्य और न्यू मीडिया के संबंध को आप किस तरह देखते  हैं ? श्रीविलास सिं‍ह : किसी भी साहित्य को पाठकों तक पहुँचने हेतु किसी

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