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कथेतर गद्य
पिछले साल पर लिखा एक लंबा निबंध/शचीन्द्र आर्य
कितनी सारी बातें होती हैं कहने के लिए । कुछ-न-कुछ तो हमेशा सबके पास रहता ही है । ऐसा लगने से हो कुछ नहीं जाता,
September 30, 2024

कथेतर गद्य
स्मरण विष्णु खरे – कृष्ण कल्पित / अविनाश मिश्र
कृष्ण कल्पित (१) केदारनाथ सिंह की अनुकृति करने की कोशिश में जितने युवा कवि नष्ट हुये उससे कुछ अधिक ही विष्णु खरे की कविता
September 30, 2024

समाज और संस्कृति
कंग्डाली भाम/ विनिता यशस्वी
इस बार तो कंग्डाली भाम देखने जाना ही है आखिर इतनी बातें जो सुनी हैं इसके बारे में और फिर 12 वर्षों में भी
September 30, 2024

कविता
बंशीधर षड़ंगी की कविता /अनुवाद – पारमिता षड़ंगी
शबरी चर्या -1 (१) राजा के महल में तेरा स्थान नहीं, शबरीवाली इतिहास के दुर्ग के
September 30, 2024

कविता
उलटबांसियों से पगा है यह क्षणिक जीवन/मंजुला बिष्ट
सखी-संवाद एक सधन्यवाद पत्र सखी!जितना समझी हूँ अब तलकसंसार में सुख-दुःख की आदी परम्परा रही है,सुख अपने भीतर गिरकर उन्मादी होते हैंतो,दूसरों के भीतर बरसकर
September 30, 2024

कविता
भैया मत पूछो अब आगे की कहानी /हरे प्रकाश उपाध्याय
कहे पत्रकार भोले शहर के सेठ का निकलता है अख़बार उसका नाम कितना प्यारा – जनता का समाचार सेठ जी का नाम बड़ा
September 30, 2024



