अनुनाद

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कथेतर गद्य

स्‍मरण विष्‍णु खरे –  कृष्‍ण कल्‍पित / अविनाश मिश्र

     कृष्‍ण कल्‍पित (१) केदारनाथ सिंह की अनुकृति करने की कोशिश में जितने युवा कवि नष्ट हुये उससे कुछ अधिक ही विष्णु खरे की कविता

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कविता

उलटबांसियों से पगा है यह क्षणिक जीवन/मंजुला बिष्‍ट

   सखी-संवाद     एक सधन्यवाद पत्र सखी!जितना समझी हूँ अब तलकसंसार में सुख-दुःख की आदी परम्परा रही है,सुख अपने भीतर गिरकर उन्मादी होते हैंतो,दूसरों के भीतर बरसकर

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