सबको अपना अपना भारत खोजना पड़ता है : हिन्दनामा पर अभिनव निरंजन
कविता-संग्रह: हिन्दनामा लेखक: कृष्ण कल्पित प्रकाशक: राजकमल, 2019 …………………………………. कुफ़्रो-इमां का फ़र्क मिटाने आया हूँ मैं जाम-बकफ़ तौबा करने आया हूँ । केवल दो पंक्तियों
कविता-संग्रह: हिन्दनामा लेखक: कृष्ण कल्पित प्रकाशक: राजकमल, 2019 …………………………………. कुफ़्रो-इमां का फ़र्क मिटाने आया हूँ मैं जाम-बकफ़ तौबा करने आया हूँ । केवल दो पंक्तियों
हमारे अनूठे गद्यकार ने अपनी फेसबुक वॉल पर कुछ टुकड़े लिखे हैं, जिनके बारे में निराला के सहारे से कहूँ तो ये फूल नहीं, जीवन
चंद्रकांत देवताले की कविता में स्त्री पक्ष चंद्रकांत देवताले साठोत्तरी कविता के प्रमुख कवि हैं, जिनकी कविता में स्त्री-जीवन की छवियॉं
यह पहाड़ पर बुझी हुई लालटेन की तरह टंगी एक जगह है, जो राज्य स्थापना के बाद से ही बाट जोह रही है कि उसे
“ पंडित शाङ्ग॔देव द्वारा वर्णित उत्तम वाग्गेयकार के रूप में पंडित कुमार गन्धर्व का स्थान ” १३ वीं शताब्दी में पं शाङ्ग॔देव द्वारा
कविता में जब नई आवाज़ें शामिल होती हैं तो यह उन आवाज़ाें के औपचारिक स्वागत से ज़्यादा कविता के मौजूदा स्वरूप को खंगालने का मौका
बहुत दिनों बाद अनुनाद पर एक साथ इतनी कविताएं लग रही हैं। यह उपहार हमें मिला है हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि अरुण शीतांश की
टॉड मार्शल की कविता कोर्ट …….. वादी के साथ लम्बे रिश्ते का संज्ञान लेती है और पूरी नेकनीयती के साथ विश्वास करती है कि
हर मनुष्य के जीवन में कोई एक शहर-क़स्बा-गांव सूर्य या फिर दीपक की तरह होता है, वह छूट जाता है पर जीवन भर हर दिन
रेखा चमोली उन नई कवियों में हैं, जिन्हें हम इस यक़ीन के साथ पढ़ते हैं कि वे हमारे सामाजिक जीवन के संघर्षों और विद्रूपों को