अनुनाद

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साहित्‍य ज़माने भर से किया जानेवाला इश्‍क़ है – कुमार अम्‍बुज

साहित्‍य में संगठनों की प्रासंगिकता पर बहस लगातार बढ़ी है। वैचारिक प्रतिरोध और विमर्श के लिए व्‍यक्तिकेंद्रित गैरवैचारिक समूहों के बरअक्‍स संगठनों की भूमिका को

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यह कविता किसी दिशा में नहीं जाती इस पर चढ़ने वाले लोग अपने उतरने की व्यवस्था स्वयं कर लें – अमित श्रीवास्‍तव

इधर दुनिया भर में मची गड़बड़ और ख़राबे के बीच भी भाषा और कविता में साहित्‍य की राजनीति के पुराने पत्‍ते फेंटने का हुनर रखने

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गूँगी नहीं हो जाती है आत्मा – प्रदीप सैनी की कविताऍं

समकालीन हिन्‍दी कविता की अन्‍तर्धारा में प्रदीप सैनी सदा ही धैर्य और संयम के साथ रचनारत दिखायी दिए हैं। अनुनाद को उनकी ये अप्रकाशित कविताऍं

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शून्‍यकाल में बनी सहमतियों के विरुद्ध – गणेश गनी की कविताऍं

गणेश गनी सुपरिचित कवि हैं। वे पारखी सम्‍पादक और संवादी समीक्षक भी हैं।  उनकी आठ कविताऍं अनुनाद को मिली हैं। कविता और समीक्षा में उनकी

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आँखें नम करते सुच्चे क़‍िस्से – मनोज शर्मा की कविताऍं

मनोज शर्मा हिन्‍दी के सुपरिचित कवि और संस्‍कृतिकर्मी हैं। जम्‍मू में उनका रचनात्‍मक रहवास शुरूआती तौर पर कविता में एक स्‍थनीयता के चित्र बनाता हुआ

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ये दु:ख की नदियॉं हैं क्‍योंकि किसानों की नदियॉं हैं – कुमार मंगलम की कविताऍं

युवा कवि कुमार मंगलम की कुछ कविताऍं अनुनाद को मिली हैं।ये कविताऍं नदियों के बारे में हैं, जैसे भाषा की नदी में सचमुच की नदी

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मैं नष्ट कविताओं के सौंदर्य से चिपट कर सोती हूँ – ज्‍योति शोभा की कविताऍं

ज्‍योति शोभा की कविताऍं अनुनाद को मिली हैं। इससे पहले उनकी कविताऍं समालोचन, सौतुक और प्रभात ख़बर में देखी गई हैं। ज्‍योति हिन्‍दी कविता संसार

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ताकता हुआ मैं दिशाकाश : कविता का युवा मौसम – सिद्धेश्‍वर सिंह

वरिष्‍ठ कथाकार – सम्‍पादक ज्ञानरंजन ने कई वर्ष पूर्व अपने एक पत्र में किसी संकोची व्‍यक्‍त‍ि के लिए कहा था कि वह जीवन के तलघर

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अजंता देव की कविताऍं

अनुनाद ने अजंता देव से कविताओं के लिए अनुरोध किया था और हमें उनकी चार शीर्षकविहीन कविताऍं मिली हैं। यहॉं कुछ बुझता है तभी कुछ

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