अरूणाचल के पानी में डूब रहा है केरल – अनामिका अनु की कविताऍं
कितनी अलग-अलग आवाज़ें इस बीच हिन्दी कविता को मिली हैं, यह देखना सुखद है। अहिन्दी प्रदेशों में हिन्दी की कविता के रचे हुए नए-नए-से ये
कितनी अलग-अलग आवाज़ें इस बीच हिन्दी कविता को मिली हैं, यह देखना सुखद है। अहिन्दी प्रदेशों में हिन्दी की कविता के रचे हुए नए-नए-से ये
साहित्य में संगठनों की प्रासंगिकता पर बहस लगातार बढ़ी है। वैचारिक प्रतिरोध और विमर्श के लिए व्यक्तिकेंद्रित गैरवैचारिक समूहों के बरअक्स संगठनों की भूमिका को
इधर दुनिया भर में मची गड़बड़ और ख़राबे के बीच भी भाषा और कविता में साहित्य की राजनीति के पुराने पत्ते फेंटने का हुनर रखने
समकालीन हिन्दी कविता की अन्तर्धारा में प्रदीप सैनी सदा ही धैर्य और संयम के साथ रचनारत दिखायी दिए हैं। अनुनाद को उनकी ये अप्रकाशित कविताऍं
गणेश गनी सुपरिचित कवि हैं। वे पारखी सम्पादक और संवादी समीक्षक भी हैं। उनकी आठ कविताऍं अनुनाद को मिली हैं। कविता और समीक्षा में उनकी
मनोज शर्मा हिन्दी के सुपरिचित कवि और संस्कृतिकर्मी हैं। जम्मू में उनका रचनात्मक रहवास शुरूआती तौर पर कविता में एक स्थनीयता के चित्र बनाता हुआ
सोनी पाण्डेय ने पिछले कुछ वर्षों में कविता के पाठकों में सम्मान अर्जित किया है। वे आम हिन्दुस्तानी स्त्री के संसार की ऐसी कवि के
युवा कवि कुमार मंगलम की कुछ कविताऍं अनुनाद को मिली हैं।ये कविताऍं नदियों के बारे में हैं, जैसे भाषा की नदी में सचमुच की नदी
ज्योति शोभा की कविताऍं अनुनाद को मिली हैं। इससे पहले उनकी कविताऍं समालोचन, सौतुक और प्रभात ख़बर में देखी गई हैं। ज्योति हिन्दी कविता संसार
वरिष्ठ कथाकार – सम्पादक ज्ञानरंजन ने कई वर्ष पूर्व अपने एक पत्र में किसी संकोची व्यक्ति के लिए कहा था कि वह जीवन के तलघर