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वर्तमान सन्दर्भ में उत्तरभारतीय तालों का व्यावहारिक स्वरूप: एकअध्ययन
वर्तमान सन्दर्भ में उत्तर भारतीय तालों का व्यावहारिक स्वरूप: एकअध्ययन श्रीमती ललिता, शोधार्थिनी, संगीत विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल डा०रेखा साह, असिस्टेन्ट प्रोफेसर, संगीत विभाग, कुमाऊँ
मुक्तिबोध मेहनतकश की आजादी के पक्षधर हैं : वरिष्ठ आलोचक जीवन सिंह से कवि महेश पुनेठा की बातचीत/2
महेश चंद्र पुनेठा- मुक्तिबोध के समय बहुत सारे आधुनिकतावादी कवि यह कहते हुए पाए जाते थे कि जनवाद,समाजवाद भीड़ की मनोवृति के परिचायक हैं।
अमित श्रीवास्तव की नई कविता – चुनो
देश के 5 राज्यों में चुनाव हैं। जनता के बीच कुछ भ्रम पहले से थे और कई इस बीच डाल दिए गए हैं। ऐसे ही
यहां लोक की बहुत ऊपरी और सतही समझ से काम नहीं चल सकता – आलोचक जीवन सिंह से कवि महेश पुनेठा की बातचीत/1
(वरिष्ठ आलोचक जीवन सिंह और सुपरिचित कवि महेश पुुनेठा की यह महत्वपूर्ण बातचीत चार खंडों में अनुनाद पर आएगी। अनुनाद इस सहयोग के लिए महेश
नरेश सक्सेना की कविता : कत्लगाहों की तरफ़ फुसलाते शब्द -आशीष मिश्र
ठंड से नहीं मरते शब्द वे मर जाते हैं साहस की कमी से केदारनाथ सिंह के इन शब्दों को आलोचना के सन्दर्भ में देखना रोचक
अमित श्रीवास्तव की दो कविताएं
इस दुनिया में रात भर जागती है कोई स्त्री इसी दुनिया में कोई कोई पागल प्रेम कर बैठता है सरल, लगभग अभिधात्मक दीखते वाक्यों के
चर्चित समकालीन मैसिडोनियन कवि निकोला मेदजीरोव की कविताएं ( पेगी, ग्राहम डब्ल्यू रीड, मेगडेल्ना होर्वट तथा एडम रीड के अंग्रेजी अनुवाद से) : हिदी अनुवाद -दुष्यंत
कवि की औपचारिक अनुमति से हिंदी में पहली बार अनूदित ये कविताएं प्रिंट में जनसत्ता में आई थीं, (वैसे ये अनुवाद मूलत : kritya international poetry
हॉली मैक्निश : स्तनपान पर शर्मिंदा : भावानुवाद एवं प्रस्तुति – यादवेन्द्र
स्तनपान के बारे में वैज्ञानिक शोध चाहे कितनी सकारात्मक बातें कहें पूरी दुनिया में युवा शहरी और कामकाजी स्त्रियों में इसको लेकर नकार का भाव बढ़ता
हिंदी दिवस विशेष : हिंदी-उर्दू कविता के गढ़वाली रूपान्तरण : नेत्र सिंह असवाल
सोशल मीडिया पर रहने दौरान अचानक मेरा ध्यान नेत्र सिंह असवाल जी की टाइमलाइन पर गया। वहां हिंदी और उर्दू कवियों की कविता के गढ़वाली
